विदिशा में डी-मार्ट के विरोध में छोटे और मझोले व्यापारियों का प्रदर्शन तीसरे दिन भी जारी रहा। डिस्ट्रीब्यूटर संगठन के नेतृत्व में व्यापारियों ने विरोध जताते हुए गले में फांसी का फंदा डालकर प्रदर्शन किया। व्यापारियों का आरोप है कि डी-मार्ट जैसे बड़े रिटेल स्टोर खुलने से छोटे दुकानदार पूरी तरह खत्म हो जाएंगे। उन्होंने प्रशासन को चेतावनी दी कि विदिशा जैसे छोटे शहर में डी-मार्ट को अनुमति देना हजारों व्यापारियों और उनके परिवारों के भविष्य पर सीधा हमला होगा। धरने में शामिल मनोज पंजवानी ने कहा कि देश के कई शहरों में मॉल खुलने के बाद छोटे व्यापारी पूरी तरह बर्बाद हो चुके हैं। गली-मोहल्लों की दुकानों से लोगों का रिश्ता होता है। मॉल खुलेंगे तो ग्राहक वहां चला जाएगा और हमारा व्यापार चौपट हो जाएगा। आज जो हमने सांकेतिक फांसी लगाई है, वही हाल कल छोटे व्यापारियों का होगा। यह आंदोलन सिर्फ व्यापार का नहीं, बल्कि हजारों परिवारों के भविष्य का सवाल है। ‘छोटे शहरों में खत्म हो रहे पारिवारिक संबंध’ भारतीय उद्योग एवं व्यापार संघ के प्रदेश अध्यक्ष राजेश जैन ने कहा कि बड़े मॉल न केवल व्यापार को प्रभावित कर रहे हैं, बल्कि भारतीय बाजार संस्कृति को भी समाप्त कर रहे हैं। पहले मॉल केवल महानगरों तक सीमित थे, लेकिन अब वे तेजी से छोटे शहरों की ओर विस्तार कर रहे हैं। छोटे शहरों में दुकानदार और ग्राहक के बीच पारिवारिक संबंध होते हैं, जिन्हें ये बड़ी कंपनियां खत्म कर रही हैं। 2002 में 2 मॉल थे, अब 600 से ज्यादा जैन ने आंकड़ों का हवाला देते हुए बताया कि वर्ष 2002 में डी-मार्ट के केवल दो मॉल थे, जबकि वर्तमान में इनकी संख्या 600 से अधिक हो चुकी है। रिलायंस और अन्य कंपनियों के मॉल हजारों की संख्या में मौजूद हैं। उन्होंने जनता से अपील की है कि वे स्थानीय दुकानों से खरीदारी करके भारतीय संस्कृति, स्थानीय बाजारों और छोटे व्यापारियों को जीवित रखने में सहयोग करें। 10 लाख से कम आबादी वाले शहरों में मॉल पर रोक लगे व्यापारियों ने प्रशासन से मांग की है कि 10 लाख से कम आबादी वाले शहरों में मॉल खोलने पर प्रतिबंध लगाया जाए। इसके अलावा, एमआरपी की तर्ज पर न्यूनतम खुदरा मूल्य (NRP) कानून लागू किया जाए और बड़ी कंपनियों को सिंगल खरीद पॉइंट का लाभ न दिया जाए।


