विदेशी बोले- वेरी चैलेजिंग, कैसे जीते होंगे यह बच्चे:जो खुद का काम भी खुद नहीं कर सकते, इंडिया हो या जर्मनी ऐसे बच्चों के लिए सरकार को करने चाहिए विशेष प्रयास

आटिज्म, सेरेब्रल पाल्सी, लार्निंग डिसेबिलिटी जैसे गंभीर रोगों से पीड़ित बच्चे जिनकों अपना रूटीन का काम-काज करने के लिए किसी दूसरों के सहारे की जरूरत पड़ती है। ऐसे बच्चों से देशी-विदेशी शोध शोधकर्ताओं का एक दल पाली के जूनी कचहरी स्थित स्वावलंबन प्रशिक्षण एवं पुनर्वास केंद्र में मिला। ऐसे बच्चों को देख जर्मनी की लिली बोली कि सच में यह ऐसे बच्चों के लिए जीवन जीना बहुत चैलेजिंग है। इन्हीं देखभाल करना भी बहुत कठिन सा काम है। जर्मनी हो या इंडिया इसी गंभीर बीमारी से पीड़ित बच्चों के लिए स्थानीय सरकारों को और बेहतर प्रयास करने चाहिए ताकि इन बच्चों को बेहतर जीवन मिल सके।
दरअसल कल्चरल ब्रिज NGO के ग्लोबल विंटर स्कूल 2025 के तहत पाली के कल्चर, इतिहास, शिक्षा और महिलाओं की स्थिति को जानने के लिए देशी-विदेशी शोधकर्ताओं का एक 13 सदस्यों का दल 10 दिन के पाली टूर्र पर आया हुआ है। जिसमें आयरलैंड, जर्मनी, अमेरिका, यूके जैसे देशों के लोग भी शामिल है। पिछले चार-पांच साल से यह दल पाली में हर साल आ रहा है। बीच में कोरोना के चलते नहीं आ पाए।
यह दल जब जूनी कचहरी स्थित स्वावलंबन प्रशिक्षण एवं पुनर्वास केंद्र में गुरुवार को पहुंचा। जहां स्वावलंबन प्रशिक्षण एवं पुनर्वास केंद्र के वैभव भंडारी ने उन्हें आटिज्म, सेरेब्रल पाल्सी, लार्निंग डिसेबिलिटी जैसी गंभीर बीामरियों से पीड़ित बच्चों के लिए संचालित किए जा रहे स्कूल और फाउंडेशन की ओर से किए जा रहे प्रयासों के बारे में एक वीडियो स्टोरी दिखाकर बताए।
जिसे देख आयरलैंड के जैकब ने कहा कि यह बच्चे दूसरों के सहारे के बिना खुद का काम भी खुद नहीं कर सकते। इनके लिए स्थानीय सरकार को विशेष प्रयास करने चाहिए ताकि इनका जीवन बेहतर हो सके। इंडिया की रहने वाले सुरभि जो आंखों से देख नहीं सकती। उसने कहा कि इस तरह की गंभीर बीमारियों को फैलने से कैसे रोका जा सकता है इसके लिए सरकार को मां के गर्भ में पल रहे बच्चे के सारे जैनेरिटिक टेस्ट भी करवाने की शुरूआत करनी चाहिए ताकि बच्चे के जन्म से पहले पता चल सके कि उसे कोई गंभीर बीमारी तो नहीं है। जिससे आगे चलकर उसे परेशानी का सामना करना पड़े। ग्रुप की अनिका ने कहा कि ऐसी गंभीर बीमारियों से पीड़ित बच्चों के लिए स्कूल खोलना, पुर्नवास काम स्वावलंबन की ओर से जो किया जा रहा है। यह किसी सेवा से कम नहीं है। उन्होंने बताया कि उनका एनजीओ इंडिया को दूसरे देशों को कनेक्ट करने का काम करता है। 22 देशों से जुड़े लोग उनके इस ग्रुप से जुड़े हुए है। कोरोना काल को छोड़ दे तो वे पिछले चार-पांच साल से यहां पाली में आ रहे है। इस दौरान वे पाली के कल्चर, यहां की शिक्षा प्रणाली, ग्रामीण कल्चर, पशुपालन, कृषि, महिलाओं ओर बालिकाओं की स्थिति पर शोध करते है। और उस पर किताब लिखते है। उनके ग्रुप में लेक्चरर, आईटी एक्सपर्ट, साइबर एक्सपर्ट, प्रोफेसर आदि शामिल है।
स्कूल पहुंचने पर दल का किया स्वागत
स्वावलंबन फाउंडेशन से जुड़े फिजियोथेरेपिस्ट नंदिनी नाग, हितेश मादड़ी, विशेष शिक्षक रमन विश्नोई, पूजा, प्रांजल, फाउंडेशन की कार्यक्रम संयोजक सयोनी सोनी ने स्कूल का विजिट करने आए इस दल का स्वागत किया और स्कूल और पुनर्वास केंद्र के बारे में बताया।

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