विदेश से मंगवाया ड्रग, शादी से 3 दिन पहले पकड़ा सप्लायर जय

भास्कर संवाददाता | बांसवाड़ा शहर में ड्रग तस्करी का बड़ा मामला सामने आया है। केंद्रीय नारकोटिक्स ब्यूरो (सीबीएन) की टीम ने फ्रांस से आए इंटरनेशनल पार्सल में प्रतिबंधित ड्रग पकड़कर इसका खुलासा किया है। यह नशीला सामान बांसवाड़ा के रातीतलाई निवासी ड्रग सप्लायर जय त्रिवेदी को डिलीवर होना था। जय के पिता सरकारी स्कूल में प्रिंसिपल हैं। जय पहले आईटी इंजीनियर था। सालभर पहले आरपीएससी क्लियर की और अभी शिक्षक था। करीब छह दिन पहले जयपुर स्थित फॉरेन पोस्ट ऑफिस (एफपीओ) में फ्रांस से आए एक संदिग्ध पार्सल की सूचना सीबीएन को मिली थी। इसके बाद कस्टम और सीबीएन जयपुर की संयुक्त टीम ने पार्सल की तलाशी ली। इसमें 480 ग्राम प्रतिबंधित एलएसडी के 20 ब्लॉट वाला एक पैकेट और 4.110 ग्राम प्रतिबंधित मेथाक्वालोन का एक पैकेट बरामद किया गया। कानूनी प्रक्रिया पूरी कर एनडीपीएस एक्ट के तहत ड्रग जब्त कर ली गई। जांच में सामने आया कि यह पार्सल बांसवाड़ा जिले में मंगवाया गया था। टीम ने डिलीवरी ट्रैक करते हुए बांसवाड़ा पहुंचकर जय त्रिवेदी की पहचान की। इसके बाद सीबीएन की टीम जय को हिरासत में लेकर जयपुर ले गई। फिलहाल उससे पूछताछ की जा रही है कि वह अब तक कितनी बार इस तरह के ड्रग पार्सल मंगवा चुका है और सप्लाई किन-किन तक की है। प्रारंभिक पूछताछ में चौंकाने वाले खुलासे हुए हैं। सूत्रों के अनुसार जय ने 7 से 8 बार इसी तरह विदेश से ड्रग मंगवाने की बात कबूल की है। उसके बैंक खातों में 10 करोड़ रुपए से अधिक के संदिग्ध ट्रांजेक्शन सामने आए हैं, जिनकी जांच की जा रही है। अगली 10 फरवरी को जय की शादी होनी थी और परिवार में इसकी तैयारियां चल रही थी लेकिन वह पकड़ा गया। कोटा के नारकोटिक्स उपायुक्त नरेश बुंदेल ने बताया कि टीम को मिले इनपुट के आधार पर यह कार्रवाई की गई। सूत्रों के अनुसार पार्सल में ड्रग होने का खुलासा होने के बाद सीबीएन टीम ने सप्लायर जय तक पहुंचने के लिए जाल बिछाया। पार्सल से ड्रग निकालकर उसमें मैगी भरी। पार्सल पर राजीव द्विवेदी नाम को वैसे ही लिखा रहने दिया। जय इसी नाम से पार्सल मंगवाता था। लेकिन पार्सल पर मोबाइल नंबर जय का लिखा था। टीम ने पार्सल को डिलीवरी के लिए रवाना किया और इसके बाद मोबाइल नंबर को ट्रेस करते हुए बांसवाड़ा शहर में जय तक पहुंचकर उसे हिरासत में ले लिया। टीम के 25 सदस्य 8 गाड़ियों में बांसवाड़ा आए थे। स्थानीय पुलिस को भी इसकी भनक नहीं लगने दी। सूत्रों के अनुसार एलएसडी एक खतरनाक साइकेडेलिक ड्रग है, जो दिमाग और इंद्रियों पर सीधा असर डालता है। यह आम तौर पर छोटी स्ट्रिप या ब्लॉट के रूप में होता है। यह ड्रग कई जगह हाई-प्रोफाइल लोगों और युवाओं को अपनी जद में ले रहा है।

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