विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास को बढ़ावा देने पर चर्चा:डाइट करौली में प्रशिक्षणार्थियों को मूल अवधारणाओं से कराया अवगत

नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के तहत विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास को बढ़ावा देने के उद्देश्य से जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थान (डाइट) करौली के WE प्रभाग द्वारा शारीरिक साक्षरता पर तीन दिवसीय प्रशिक्षण का आयोजन किया गया। यह प्रशिक्षण कार्यक्रम 27 से 29 जनवरी 2026 तक आयोजित किया गया। इसका संचालन WE प्रभागाध्यक्ष शशिवाला पाराशर के मार्गदर्शन में हुआ। प्रशिक्षण का उद्घाटन डाइट प्राचार्य एवं जिला शिक्षा अधिकारी (माध्यमिक) इन्द्रेश तिवाड़ी, डाइट उपप्राचार्य गिरीश कुमार गुप्ता और WE प्रभागाध्यक्ष शशिवाला पाराशर ने सरस्वती माता के चित्रपट पर दीप प्रज्वलन कर किया। इस अवसर पर डाइट प्राचार्य इन्द्रेश तिवाड़ी ने प्रशिक्षणार्थियों से अनुभव साझा करते हुए कहा कि नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 विद्यार्थियों को केवल शैक्षणिक ज्ञान तक सीमित नहीं रखती, बल्कि उनके सर्वांगीण विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। डाइट उपप्राचार्य गिरीश कुमार गुप्ता ने “स्वस्थ शरीर में ही स्वस्थ मस्तिष्क का वास होता है” का महत्व बताया। प्रभागाध्यक्ष शशिवाला पाराशर ने शारीरिक साक्षरता के महत्व और आवश्यकता पर प्रकाश डाला, साथ ही प्रशिक्षणार्थियों को इसकी मूल अवधारणाओं से अवगत कराया। वरिष्ठ शारीरिक शिक्षक अटल भारद्वाज प्रशिक्षण के संदर्भ व्यक्ति रहे, जिन्होंने राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के अंतर्गत शारीरिक शिक्षा साक्षरता के महत्व, आवश्यकता और लक्ष्यों को विस्तार से समझाया। प्रशिक्षण के दौरान विद्यार्थियों में नैतिक मूल्यों, अनुशासन, शारीरिक साक्षरता, समग्र विकास, समावेशिता, समन्वय और व्यवहारिक दृष्टिकोण विकसित करने पर विशेष बल दिया गया। तीन दिवसीय इस कार्यक्रम में शारीरिक शिक्षा से जुड़े विभिन्न बिंदुओं पर चर्चा और संवाद हुआ। प्रशिक्षणार्थियों में शारीरिक शिक्षक वेदरत्न जैमिनी, कैलाश जाट, महेन्द्र गौतम, डॉ. शिवेन्द्र दुबे, सुनील यादव, मनीष शर्मा, ममता बैनीवाल, कमलेश, दिनेश सैनी, विनीत मीणा और गौरी शंकर शर्मा सहित कई अन्य शिक्षक शामिल थे। उन्होंने शारीरिक साक्षरता पर अपने विचार प्रस्तुत किए। प्रशिक्षण के अंतिम दिन सभी प्रशिक्षणार्थियों को मैदान में खेल उपकरणों के माध्यम से विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास को खेल-खेल में कैसे विकसित किया जा सकता है, इसका प्रायोगिक अभ्यास करवाया गया।

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