विधानसभा सत्र:अनुपूरक बजट पर चर्चा, भाजपा और कांग्रेस के बीच जमकर तकरार

मप्र में हर व्यक्ति पर 60 हजार रुपए कर्ज : विपक्ष कर्ज नहीं ले रहे, ये हम निवेश कर रहे : सरकार विधानसभा में बुधवार को अनुपूरक बजट पर चर्चा के दौरान कांग्रेस नेताओं ने कहा, मप्र का हर व्यक्ति 60 हजार रुपए का कर्जदार है। यहां एक साल में 20–20 बार कर्ज लिया जा रहा है। वे वित्त मंत्री द्वारा अनुपूरक बजट पेश करने के बाद उसके खिलाफ बोल रहे थे। जवाब देते हुए वित्त मंत्री जगदीश देवड़ा ने कहा कि हम कर्ज नहीं ले रहे हैं, बल्कि प्रदेश के विकास में निवेश कर रहे हैं। अनुपूरक बजट की चर्चा के दौरान सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच जमकर शोर शराबा हुआ।
चर्चा के दौरान हंगामा तब शुरू हुआ, जब विधानसभा अध्यक्ष नरेंद्र सिंह ताेमर ने नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार का नाम लिए बगैर वित्त मंत्री जगदीश देवड़ा को भाषण के लिए बुला लिया। इस बात से नाराज सिंघार व कांग्रेस के सभी विधायकों ने हंगामा शुरू कर दिया। डॉ. हीरालाल ​अलावा और एक अन्य विधायक गर्भगृह में धरने पर बैठ गए। कुछ विधायक आसंदी तक पहुंच गए। इनका कहना था कि नेता प्रतिपक्ष को बुलाए बगैर वित्त मंत्री का भाषण नहीं होना था। हंगामा और नारेबाजी बढ़ते देख अध्यक्ष ने 15 मिनट के लिए कार्यवाही स्थगित कर दी। इसके बाद जब दोबारा कार्यवाही शुरू हुई तो वित्त मंत्री के भाषण के बीच नेता प्रतिपक्ष ने आपत्ति लेते हुए पूरा भाषण दिया। कार्यवाही रात 8 बजे तक चली। कौन सा राज्य कर्ज नहीं लेता : मंत्री कांग्रेस के आरोपों का जवाब देते हुए वित्त मंत्री जगदीश देवड़ा ने अपने भाषण में कहा कि कौन सा राज्य है, जो कर्ज नहीं लेता। हम कर्ज नहीं ले रहे हैं, बल्कि निवेश कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि हमारी सरकार इस ऋण राशि का उपयोग प्रदेश के विकास में करती है। इसीलिए हम इसे कर्ज नहीं, निवेश मानते हैं। उन्होंने ​बताया कि सरकार के कर्ज लेने की सीमा भारत सरकार तय करती है। यह भी बताया कि इस वित्तीय वर्ष में नाबार्ड से आरआईडीएफ के अन्तर्गत लगभग 4 हजार करोड़ तथा सिडबी से लगभग 300 करोड़ रुपए का कर्ज लेने का प्रयास करेंगे। एयर एंबुलेंस अमीरों के लिए : कांग्रेस सिंघार ने कहा कि मप्र में 600 करोड़ के प्रोजेक्ट को 1200 करोड़ में बदल दिया जाता है। एयर एंबुलेंस का फायदा केवल अमीरों को मिल रहा है। उपनेता प्रतिपक्ष हेमंत कटारे ने कहा कि एक ब्लेक लिस्टेड कंपनी को एक दिन में 7 हजार करोड़ रुपए से अधिक का काम दे दिया जाता है। वहीं हमीदिया में वेतन नहीं मिल रहा है।

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