प्रदेश में सरकारी मंदिरों के व्यवस्थापन और जमीनों से जुड़े विवादों का हल निकालने के लिए हाल में दो सदस्यीय कमेटी बनाई है। अब इस कमेटी में विपक्ष की ओर से भी एक नाम और जोड़ा जाएगा। नेता प्रतिपक्ष किसी सदस्य को नामित कर सकते हैं। जिन मंदिरों की जमीन अलग-अलग जिलों में फैली है उन्हें किसी एक जिले में शिफ्ट कर सकते हैं या नहीं, इस पर भी विचार किया जाएगा। मंदिरों की जमीन पर अवैध कब्जा है तो उसे हटाया जाएगा। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने बुधवार को विधानसभा में प्रश्नकाल के दौरान यह आश्वासन दिया। इससे पहले नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने प्रदेश के सभी सरकारी मंदिरों से सरकारी अफसरों का नियंत्रण हटाकर उनके प्रबंधन के लिए नीति बनाने और मंदिरों का प्रबंधन अखाड़ों और पुजारियों को सौंपने की मांग की। मुआवजा : राजस्व मंत्री पर हमलावर रहा विपक्ष प्रश्नकाल में राजस्व मंत्री करण सिंह वर्मा विपक्षी विधायकों के निशाने पर रहे। जयवर्धन सिंह ने राघौगढ़ में अतिक्रमण हटाने की मांग से जुड़े पत्रों का जवाब नहीं देने पर संबंधित अफसरों पर कार्रवाई की मांग की। वहीं लखन घनघोरिया ने जबलपुर में खदान धंसने से दलित मजदूरों की मौत पर एट्रोसिटी एक्ट के तहत मुआवजा नहीं दिए जाने का मुद्दा उठाया। लेकिन राजस्व मंत्री ने आदिवासियों से जुड़े एक्सीडेंट के मुद्दे की जानकारी दे दी, इस पर लखन घनघोरिया ने दलितों के साथ भेदभाव का आरोप लगा दिया। बाला बच्चन ने मालवा निमाड़ में फसल हानि का मुआवजा नहीं बांटे जाने पर सवाल किया तो राजस्व मंत्री ने कहा कि हमने सारा मुआवजा दे दिया है। इस पर कांग्रेस ने कहा, मंत्री की जानकारी अपडेट नहीं है।


