राजधानी के पॉश इलाके शैलेंद्र नगर में विधायकों के लिए विश्राम गृह संगवारी बनाया गया है। इसके 9 ब्लॉक में 54 फ्लैट हैं। लेकिन वर्तमान में सिर्फ दो विधायक दिलीप लहरिया और नीलकंठ टेकाम ही इसमें रहते हैं। विधायकों के यहां न रहने से सरकार को हर साल करीब दो करोड़ रुपए का नुकसान हो रहा है, क्योंकि 52 विधायक यहां न रहकर विधानसभा से हर महीने 30 हजार रुपए किराया ले रहे हैं। विधायकों के न रहने की वजह से यह उजाड़ हो गया है। जबकि यहां रहने के लिए विधायकों को मात्र 3 रुपए महीने देना होता है।
पिछली सरकार में भी सिर्फ दो ही विधायकों ने यहां रूम लिया था। वहीं हर दूसरे साल पीडब्ल्यूडी विभाग इन फ्लैट की पुताई पर ही करीब 25 लाख रुपए खर्च कर रहा है। जिस फ्लैट में कोई रहता नहीं उसके कमरों की आए दिन मरम्मत में लाखों रुपए खर्च करने का खेल चल रहा है। बता दें कि 90 में से 54 विधायकों ने किराये का विकल्प चुना है। 18 विधायक ऐसे हैं, जिन्होंने अभी कोई विकल्प नहीं चुना है। बाकी को मंत्री स्तर के बंगले अलॉट हैं। दो बार पुताई, 50 लाख खर्च खाली पड़े विश्राम गृह में पीडब्ल्यूडी भी जमकर पैसा खर्च करता है। तीन साल में इसकी दो बार पुताई करवाई गई और 50 लाख रुपए खर्च कर दिए गए। 10 साल पहले किराया भत्ता शुरू, शर्त थी- यह ऐच्छिक होगा करीब 15 साल तक विधायक इसी विश्राम गृह में रहते थे। इस दौरान बरसात में यहां पानी जमा होने की शिकायत लगातार बनी रहती थी। इस शिकायत पर सैकड़ों पत्राचार हुए। आखिर में 10 साल पहले विधानसभा में विधायकों की मांग पर उन्हें किराया भत्ता दिए जाने का फैसला लिया गया। शर्त यह रखी गई कि यह ऐच्छिक होगा, जो विधायक विश्राम गृह में रहेंगे उन्हें किराया नहीं मिलेगा। उसके बाद से यह उजाड़ होना शुरू हो गया। खाली फ्लैट की भी की जा रही मरम्मत विश्राम गृह बन गया गेस्ट हाउस
विधायकों के न रहने की वजह से अब यह गेस्ट हाउस टाइप का बनकर रह गया है। यहां माननीय कभी-कभी रुकते हैं। इसकी बुकिंग विधानसभा से की जाती है। वर्ष 2000 में जब छत्तीसगढ़ राज्य बना तो उस समय रायपुर डेवलपमेंट अथॉरिटी ने यह बिल्डिंग बेचने के लिए बनाई थी। तत्कालीन सीएम अजीत जोगी ने पॉश इलाके में बेहतर होने की वजह से इसे विधायक विश्राम गृह घोषित कर दिया। अभी मस्तूरी और केशकाल के दो विधायक के नाम ही आवंटन है। बरसात में पानी जमा हो जाता है। इसलिए बाकी यहां रहने से बचते हैं। यहां अमला नहीं है, क्योंकि ज्यादा विधायक नहीं रहते। मेंटनेंस की जानकारी नहीं दे पाएंगे। -भावना उपाध्याय, प्रभारी, विधायक विश्रामगृह


