दैनिक भास्कर द्वारा किए गए तीन विधायकों के स्टिंग ऑपरेशन के मामले में विधानसभा के मुख्य सचेतक जोगेश्वर गर्ग ने अहम बयान दिया है। गर्ग ने स्पष्ट किया है कि स्टिंग में भले ही हकीकत में कोई लेन-देन नहीं हुआ हो, लेकिन बातचीत में ‘हां’ भरना भी गलत है। मामले की जांच विधानसभा की सदाचार कमेटी कर रही है, जिसकी रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई होगी। जालोर से ही लिख दिया था अध्यक्ष को पत्र जोधपुर प्रवास के दौरान सर्किट हाउस में मीडिया से बातचीत करते हुए मुख्य सचेतक ने बताया कि स्टिंग का मामला सामने आते ही उन्होंने तत्काल संज्ञान लिया था। गर्ग ने कहा, “जैसे ही मुझे पता चला, मैं उस समय जालोर में था, मैंने तुरंत पत्र लिखकर विधानसभा अध्यक्ष को भेजा। उन्होंने पत्र स्वीकार करते हुए मामला सदाचार समिति को सौंप दिया।” सदाचार कमेटी करेगी फैसला गर्ग ने बताया कि सदाचार कमेटी (Ethics Committee) के चेयरमैन बगरू विधायक कैलाश वर्मा हैं। कमेटी को अधिकार है कि वह मामले की जांच करे और अध्यक्ष को अपनी अनुशंसा भेजे। चौथा मामला रंगे हाथों पकड़े जाने का तीन विधायकों के स्टिंग और एक अन्य मामले में अंतर स्पष्ट करते हुए मुख्य सचेतक ने कहा कि बीएपी (BAP) मेंबर वाला चौथा मामला बिल्कुल अलग है, क्योंकि वह रंगे हाथों पकड़े गए थे और उनके हाथ से कैश मिला था। वहीं, इन तीन विधायकों के मामले पर गर्ग ने तर्क दिया, “इसमें स्टिंग है। स्टिंग का मतलब यह है कि हकीकत में कोई लेन-देन नहीं हो रहा था। केवल बात हो रही थी। बात में भी कोई हां भरता है, वह भी गलत है।” विधायक से उच्च नैतिकता की उम्मीद गर्ग ने कहा कि नैतिकता का सवाल सिर्फ विधायक या सांसद के लिए नहीं, बल्कि हर आम नागरिक के लिए है। लेकिन विधायक एक जनप्रतिनिधि है, इसलिए उसकी जिम्मेदारी ज्यादा बढ़ जाती है। अध्यक्ष लेंगे अंतिम निर्णय जांच रिपोर्ट आने के बाद कार्रवाई की प्रक्रिया पर गर्ग ने बताया कि यदि मामला अध्यक्ष के अधिकार क्षेत्र का होगा, तो वे स्वयं निर्णय लेंगे। यदि सरकार के स्तर पर कुछ करना होगा, तो अध्यक्ष मुख्यमंत्री को सुझाव या आदेश देंगे।


