नमस्कार जयपुर में हवामहल वाले ‘विधायक बाबाजी’ स्कूटर पर बिना हेलमेट हवा खाते हुए वायरल हो गए हैं। जबकि प्रदेशभर में सड़क सुरक्षा को लेकर ट्रैफिक पुलिस टाइट है। जालोर में पंचों ने बहू-बेटियों को लेकर अजीबोगरीब फरमान जारी कर दिया। पूर्व मंत्री राजेंद्र राठौड़ को चूरू में ‘भैरूजी का भूत’ याद आ गया। राजस्थान की राजनीति और ब्यूरोक्रेसी की ऐसी ही खरी-खरी बातें पढ़िए, आज के इस एपिसोड में… 1. विधायक बाबाजी की ‘हेलमेट लेस राइडिंग’ वे हवामहल से विधायक हैं। इसलिए उन्हें हवा से खास लगाव है। विधानसभा क्षेत्र की हवा खराब करने वालों पर वे सख्त नजर आते हैं। उन्होंने अतिक्रमण करने वालों की हवा निकाल रखी है। वे कभी हवाबाजी नहीं करते। जो करते हैं धड़ाके से करते हैं। लेकिन बाबाजी उस वक्त नजर में आ गए जब थोड़ी दूर एक कार्यकर्ता के स्कूटर पर बैठकर इलाके का मुआयना करने निकल पड़े। बाबाजी दोनों पैर एक तरफ करके स्कूटर सवार के पीछे बैठे थे। अब जरा सी दूर में क्या हेलमेट का बोझ सिर पर उठाना। और फिर पुलिस की भी क्या हिमाकत जो फायरब्रांड बाबाजी को हेलमेट के लिए रोका-टोकी करे, सवाल पूछे। बाबाजी हवा खाते हुए आराम से स्कूटर पर जा रहे थे। पीछे आ रहे दूसरे दुपहिया सवार ने जोश-जोश में बाबाजी का वीडियो बना लिया। उसी जोश के साथ सोशल मीडिया पर पोस्ट कर दिया। अब यह वीडियो भी खूब घूम रहा है। हालांकि ट्रैफिक रूल्स को लेकर पुलिस प्रदेशभर में सख्त है। चालान पर चालान काटे जा रहे हैं। स्कूली बच्चे रैलियां निकाल रहे हैं। चौमूं में एक नाबालिग नया-नया राइडर बाइक पर तीन सवारी लेकर सड़क पर उतर गया। और कहीं से निकलता तो ठीक था, लेकिन वह चौमूं थाने के सामने से निकला। वहीं SHO प्रदीप शर्मा तैनात थे। उन्होंने लड़के को दबोच लिया और खूब खरी-खरी सुनाई। लड़के को पता नहीं था कि ट्रैफिक नियम तोड़ने रेल तो बनेगी ही, रील भी बन जाएगी। SHO साहब रील-प्रेमी जो हैं। 2. बहू-बेटियों के लिए स्मार्टफोन पर प्रतिबंध लड़कों के कारण समाज में संस्कार से संबंधित कोई समस्या पैदा नहीं होती। इसलिए समाज को सही ढर्रे पर रखने के लिए ‘बहू-बेटियों’ का दायरे में रहना जरूरी है। जब तक स्मार्टफोन नहीं था, तब तक बहू बेटियां दायरे में थीं। कैमरे वाला फोन हाथ में आते ही दायरों को धता बताकर वे दहलीज पार करने लगी। इसके बाद समाज का पतन शुरू हो गया। वर्तमान में समाज का सत्यानाश हो गया है। इसकी जड़ स्मार्टफोन है। अगर समाज को बचाना है तो बहू-बेटियों से स्मार्ट फोन छीनना पड़ेगा। स्मार्ट फोन की तिलांजलि देनी पड़ेगी। कुछ ऐसी ही बातों पर गौर करने के बाद 15 गांवों के पंचों ने फैसला कर लिया निम्न लिखित प्रस्ताव पास किया जाए- समाज में बहू बेटियों के पास कैमरे वाला फोन नहीं होगा। बहू बेटियां की-पैड वाला फोन ही रख सकती हैं। पढ़ाई करने वाली लड़कियां (अगर जरूरी हो तभी) घर में पढ़ाई के लिए स्मार्ट फोन का इस्तेमाल कर सकती हैं, लेकिन वे स्मार्टफोन लेकर घर से बाहर नहीं निकल सकती। बहू-बेटियां शादी ब्याह के कार्यक्रम में कैमरे वाला फोन नहीं ले जा सकती। किसी सार्वजनिक कार्यक्रम में भी स्मार्टफोन नहीं ले जा सकती। पड़ोसी के घर भी स्मार्टफोन नहीं ले जा सकती। फैसले को सिर-आंखों पर रखा गया और 26 जनवरी के पावन मौके पर लागू करने का निर्णय लिया गया। कहीं-कहीं से विरोध के स्वर उठे तो समाज के अध्यक्ष ने सफाई दी- बहू-बेटी से फोन लेकर बच्चे देखने लगते हैं। इससे उनकी आंखें खराब होती हैं। 3. राजेंद्र राठौड़ और ‘भैरूजी का भूत’ वे पार्टी में काफी सीनियर नेता है। नेता प्रतिपक्ष रह चुके हैं। एक समय वे सीएम पद की रेस में थे। लेकिन राजनीति में जनता ही जनार्दन होती है। जनता ने उन्हें चुनाव में पटखनी दे दी। हालांकि इससे उनका ऑरा कम नहीं हुआ। न उनकी सेहत पर कुछ खास फर्क पड़ा है। लेकिन पार्टी के सत्ता में रहने के बावजूद वे किनारे पर हैं, क्योंकि वे चुनाव नहीं जीत सके। इसका उन्हें मलाल है। वे चूरू के सरदारशहर पहुंचे थे। वहां उनका भव्य और ऐतिहासिक स्वागत हुआ। फूलों की भारी-भरकम माला पहनाई गई। केसरिया साफा पहनाया गया। गर्मजोशी से किए गए स्वागत ने चुनावी जख्म को कुरेद दिया। उन्होंने कार्यकर्ताओं और आमजन को संबोधित करना शुरू किया। जब बात चुनाव की आई तो टीस उभर आई। उन्होंने कहा- स्वागत तो आपने बड़ा जोरदार किया है। कुसुमल पाग (केसरिया साफा) पहनाया है। भारी माला से अभिनंदन किया है। लेकिन चुनाव आता है तो पता नहीं आपके सिर पर कौन सा भैरूजी का भूत चढ़ जाता है जो वोट कहीं और डाल आते हो। इसके बाद तालियों की गड़गड़ाहट हो गई। कुछ लोग ठहाका मारकर हंस पड़े। वे भी हंसे। लेकिन तालियों और खिलखिलाहट ने भी जख्म पर नमक ही छिड़का होगा। 4. चलते-चलते.. वे भारतीय जनता पार्टी के पूर्व प्रदेशाध्यक्ष हैं। उनके पास हरियाणा राज्य का प्रभार है। उनका नाम सतीश पूनिया है। उनका एक वीडियो सामने आया है। यह वीडियो उन्होंने अपने सोशल मीडिया अकाउंट पर शेयर किया है। इसमें वे कार में बैक सीट पर बैठे हैं। कार में गाना बज रहा है। गाने के बोल हैं- मैं जिंदगी का साथ निभाता चला गया, हर फिक्र को धुएं में उड़ाता चला गया। हालांकि यह फिल्म 1961 की हम दोनों है और इसमें अभिनेता पहाड़ियों पर पैदल घूमते हुए धूम्रपान करता है। लेकिन पूनियाजी सिर्फ गीत के बोल और लयकारी का आनंद लेते हुए दोनों हाथों से उंगलियां बजा रहे हैं। वे कार में बैक सीट पर हैं। बैक सीट उन्हें रास आ गई है। आमेर में विधानसभा चुनाव हारने के बाद वे नर्वस हो गए थे। लेकिन बिहार में पार्टी की बड़ी जीत के बाद उनका आत्मविश्वास सातवें आसमान पर है। वहां भी वे बैक सीट पर चुनाव ड्राइव कर रहे थे। वे किंग नहीं बन सके, लेकिन अब बड़े चुनावों के छुपे रुस्तम और किंगमेकर कहलाने लगे हैं। इसी गीत के बोल हैं- जो मिल गया उसी को मुकद्दर समझ लिया, जो खो गया मैं उसको भुलाता चला गया। वीडियो देखने के लिए ऊपर फोटो पर क्लिक करें। अब कल मुलाकात होगी…


