विपरीत परिस्थितियों में साथ निभाना ही मित्र का सच्चा धर्म: पं. भूपत

कम्युनिटी रिपोर्टर | भिलाई वीआईपी नगर रिसाली में आयोजित त्रिवेणी ज्ञान यत्र सप्ताह के अंतिम दिन कथावाचक पं. भूपत नारायण शुक्ला ने मित्रता का महत्व बताया। उन्होंने कहा कि मित्रता हो तो कृष्ण सुदामा जैसी हो। इनकी मित्रता में समर्पण का ऐसा भाव है जो संपूर्ण मानवजाति को प्रेरणा देता है। मित्रता में गरीबी और अमीरी नहीं देखनी चाहिए। मित्र एक-दूसरे के पूरक होते हैं। अपने मित्र का विपरीत परिस्थितियों में साथ निभाना ही मित्रता का सच्चा धर्म है। मित्र वह है जो अपने मित्र को सही दिशा प्रदान करे,जो कि मित्र की गलती पर उसे रोके और सही राह पर उसका सहयोग दे। उन्होंने कहा कि सुदामा चरित्र हमें जीवन में आई कठिनाइयों का सामना करने की सीख देता है। सुदामा ने भगवान के पास होते हुए अपने लिए कुछ नहीं मांगा। अर्थात निस्वार्थ समर्पण ही असली मित्रता है। आयोजन समिति के विष्णु पाठक ने बताया कि कथा के दौरान परीक्षित मोक्ष व भगवान सुखदेव की विदाई का वर्णन किया गया। कथा के बीच-बीच में भजनों पर श्रद्धालुओं ने नृत्य भी किया। कार्यक्रम में शंकराचार्य इंजीनियरिंग, मेडिकल कॉलेज से आईपी मिश्रा द्वारा पं. जितेन्द्र नाथ मिश्र गाजीपुर यूपी, महंत अवधबिहारी दास, रामज्ञानी दास महात्यागी, डॉ. गोविंद रामानु‌जाचार्य, संत बृजराज दास, महंत गोविंद दास, संत श्याम दाम, आचार्य वेद प्रकाश, सुरेन्द्र गौतम शास्त्री, साध्वी प्रतिभा आदि का सम्मान किया गया। कथा में दुर्ग ग्रामीण विधायक ललित चंद्राकर, पूर्व विधानसभा प्रेम प्रकाश पांडे, पूर्व मंत्री रमशीला साहू, राम जन्मोत्सव समिति से मनीष पांडे, दुर्ग आईजी रामगोपाल गर्ग, एएसपी आरटीओ यूवीएस चौहान, खुर्सीपार थाना प्रभारी आनंद शुक्ला मौजूद रहे। समापन अवसर पर भंडारे का आयोजन भी किया गया। सैकड़ों भक्तों ने यहां प्रसाद ग्रहण किया।

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