ग्रामोद्योग मंत्री गजेंद्र यादव ने सोमवार को महामाया गृह निर्माण प्रा. लि. डुमरतराई स्थित एलके लॉजिस्टिक पार्क फेज-2 में स्थापित गोदाम का निरीक्षण किया। इसका संचालन हथकरघा विकास व विपणन सहकारी संघ मर्यादित द्वारा किया जाता है। वहां उन्होंने अधिकारियों से कहा कि शासकीय विभागों में सिर्फ छत्तीसगढ़ के ही बुनकरों द्वारा उत्पादित वस्त्रों का ही उपयोग होना चाहिए। इससे राज्य के कुटीर और हथकरघा उद्योग को बढ़ावा मिलेगा। साथ ही बुनकरों को स्थानीय स्तर पर ही रोजगार उपलब्ध होगा। 225 करोड़ का वस्त्र स्टॉक उपलब्ध ग्रामोद्योग सचिव श्याम धावड़े ने बताया कि राज्य के बुनकरों द्वारा गणवेश वस्त्र, रेडीमेड गणवेश, धागा चादर, दरी, मच्छरदानी, जेकार्ड पर्दा, बस्ता, क्लॉथ, पॉलिएस्टर साड़ी, मेडिकल चादर और ग्रीन क्लॉथ सहित 60 प्रकार के वस्त्रों का उत्पादन किया जा रहा है। संघ के पास 4 लाख रंगीन चादर, 1.69 लाख कंबल, 1.90 लाख पॉलिएस्टर सा, 18 हजार दरी समेत 225 करोड़ रुपये का वस्त्र स्टॉक उपलब्ध है।


