भास्कर न्यूज | अमृतसर संयुक्त किसान मोर्चा से जुड़े विभिन्न किसान संगठनों, ट्रेड यूनियनों, बिजली बोर्ड यूनियनों और मजदूर संगठनों के आह्वान पर शुक्रवार को अमृतसर में रोष प्रदर्शन किया गया। हजारों की संख्या में पहुंचे किसानों, महिलाओं और मनरेगा कर्मियों ने जिलाधीश कार्यालय के समक्ष 2 घंटे तक प्रदर्शन किया और केंद्र सरकार की नीतियों के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। उन्होंने इलेक्ट्रिसिटी और सीड अमेंडमेंट बिल को रद्द करने, चार लेबर विरोधी कोड को रद्द करने और मनरेगा स्कीम के पहले रूप को ही बहाल करने की मांग की। इस मौके पर जिलाधीश कार्यालय के जरिए प्रधानमंत्री नरिंदर मोदी के नाम ज्ञापन भी सौंपा गया है। इस अवसर पर सभा को संबोधित करते किसान नेता डॉ. सतनाम सिंह अजनाला, जतिंदर सिंह छीना, लखबीर सिंह निजामपुरा, डॉ. परविंदर सिंह कर्मपुरा, भूपिंदरजीत सिंह छीना, काबल सिंह छीना, हरजीत सिंह झीता, गुरदेव सिंह वरपाल, बलबीर सिंह मुधल, उमराज सिंह धारदियो, ट्रेड यूनियन नेता अमरजीत सिंह असल, सुच्चा सिंह अजनाला, जगतार सिंह कर्मपुरा, बिजली कर्मचारी नेता नरिंदर बल, कुलदीप सिंह उदोके, गुरप्रीत सिंह जस्सल, कृष्ण सिंह और नरेगा व खेत मजदूर नेता बलकार सिंह दुधाला, अमरीक सिंह दाउद, मंगल सिंह खुजाला, भैंजी देसविंदर कौर, भैंजी कंवलजीत कौर इत्यादि ने कहा कि केंद्र सरकार देश की बागडोर कॉर्पोरेट घरानों को सौंपना चाहती है और देश के कृषि क्षेत्र पर कॉर्पोरेट्स द्वारा कब्जा करने के लिए ही बिजली संशोधन और बीज बिल लाए गए हैं और मजदूरों का शोषण करने के लिए चार श्रम कोड लागू किए गए। उन्होंने कहा कि बिजली संशोधन एक्ट लागू होने से लोगों की पहुंच से बिजली छीन ली जाएगी, बीज बिल के जरिए सरकारी यूनिवर्सिटी से बीज रिफाइनिंग का काम न लेकर बड़ी कंपनियों के महंगे बीज मार्केट में आ जाएंगे, जिससे पहले से ही कर्ज के बोझ तले दबे किसान और संकट में पड़ जाएंगे, चार लेबर कोड लागू होने से काम के घंटे बढ़ाकर मजदूरों की लूट का रास्ता बनाया जा रहा है और मनरेगा स्कीम का फायदा उठाकर बनाए गए कानून में रोजगार मिलना नामुमकिन है। नेताओं ने कहा कि सरकार की जनविरोधी नीतियों के खिलाफ कड़ा संघर्ष ही असली रास्ता है।


