विशेषज्ञ बोले- अस्थमा के रोगी ठंड में बाहर न निकलें:सर्दी में बढ़ा अस्थमा का अटैक, श्वसन रोग विभाग में 154 बेड फुल, किट नहीं, जांचें बंद

सर्दी बढ़ने के साथ ही पीबीएम हाॅस्पिटल में सीओपीडी अस्थमा के राेगियाें की संख्या भी बढ़ गई है। श्वसन राेग विभाग के सभी 154 बेड फुल हैं। पीबीएम हाॅस्पिटल में शुगर और यूरिया की जांच बंद हाे गई है। इनके किट ही नहीं है। शूगर और यूरिया रुटीन की जांच है। हर लगभग हर मरीज काे डाॅक्टर लिखते हैं। ऑपरेशन वाले केस में यह जांचें करानी अनिवार्य हाेती है, लेकिन इन दिनाें बाहर से करवानी पड़ रही है। कड़ाके की ठंड और काेहरे के कारण बुजुर्गाें के श्वास में तकलीफ के मामले अधिक आ रहे हैं। श्वसन राेग विभाग में आम दिनाें में ओपीडी 450 का रहता है, लेकिन सर्दी के कारण 250 से 300 मरीज राेज आ रहे हैं। रुटीन के मरीज बहुत ही कम आ रहे हैं। ज्यादातर राेगी अस्थमा और सीओपीडी के हैं। श्वसन राेग विशेषज्ञ डाॅ. प्रमाेद ठकराल ने बताया कि पहले से अस्थमा पीड़ित राेगियाें के लिए यह माैसम कष्टदायक है। सर्दी बढ़ने के कारण इन दिनाें पुराने राेगी ही अधिक आ रहे हैं। उनमें भी अधिकांश बुजुर्ग हैं। सर्दी के कारण अस्थमा का अटैक बढ़ गया है। इससे बचने के लिए राेगियाें काे सलाह दी गई है कि सुबह धूप निकलने पर ही बाहर निकलें। शरीर काे गर्म कपड़ाें से ढक कर रखें। तली हुई वस्तुओं से परहेज करें। डॉ. ठकराल का कहना है कि रोकथाम हमेशा इलाज से बेहतर होती है। श्वसन संबंधी बीमारियां जानलेवा हो सकती हैं, लेकिन अच्छी खबर यह है कि वे निवारक हैं। इसलिए, श्वसन संबंधी समस्याओं से निपटने के लिए समय और प्रयास खर्च करना बेहतर है, बजाय इसके कि तब तक इंतजार करें जब तक कि यह खराब न हो जाए। श्वसन संबंधी बीमारियों में से सीओपीडी भारत में दूसरी सबसे घातक फेफड़ों की बीमारी है। यह श्वसन प्रणाली को प्रभावित करता है और फेफड़ों को नुकसान पहुंचाता है। नहीं हो पा रही शुगर, यूरिया और पीलिया की जांच दरअसल बायोकेमेस्ट्री में करीब 30 तरह की जांचें हाेती हैं। ये कभी भी बंद हाे सकती हैं। इनके किट खरीदने के लिए टेंडर ही अब तक नहीं हाे पाए हैं। बायोकेमेस्ट्री विभाग के पास उपलब्ध स्टाॅक से ही काम चल रहा है। शुगर और यूरिया की जांच के किट खत्म हाे चुके हैं। राेज औसत 800 मरीजाें के यह दाेनाें जांचें हाेती थीं। इन मरीजाें काे अब बाहर से करानी पड़ रही है। इसी प्रकार पीलिया की जांच भी किट नहीं हाेने के कारण बंद हाे गई है। बताया जाता है कि जांच किट खरीदने के लिए 2023 में टेंडर हुआ था, जाे दिसंबर 24 में खत्म हाे गया। कंपनी ने सप्लाई भी बंद कर दी। लैब में फिलहाल उपलब्ध स्टाॅक से काम चल रहा है, लेकिन समय पर खरीद नहीं हुई ताे सभी जांचें बंद हाे जाएंगी। दूसरी तरफ पांच तरह के पैरामीटर की जांच के लिए एक अन्य टेंडर मार्च में खत्म हाेगा। वर्तमान में उसी की सप्लाई चालू है। फुल ऑटाे एनालाइजर मशीन अब तक खराब बायोकेमेस्ट्री लैब में दाे फुल ऑटोमेटिक बायोकेमिस्ट्री एनालाइजर मशीन खराब थी, जिसमें एक ही ठीक हाे पाई है। इस मशीन के ठीक हाेने से 15 तरह की जांचें शुरू हाे गई हैं। जबकि एक अन्य मशीन अब तक खराब पड़ी है। पीबीएम में उपकरण ठीक करने के लिए सरकार ने सायरस नामक कंपनी काे ठेका दे दिया है। सीओपीडी क्या है सीओपीडी प्रगतिशील क्रॉनिक इन्फ्लेमेटरी फेफड़ों की बीमारियों का एक समूह है, जो फेफड़ों से हवा के प्रवाह में बाधा डालता है और सांस लेना मुश्किल बनाता है। इसके निदान में इमेजिंग टेस्ट, रक्त परीक्षण और फेफड़ों के कार्य परीक्षण शामिल हैं। सीओपीडी की रोकथाम कैसे करें

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