सरकार की ट्रांसफर पॉलिसी:शहरी कर्मचारियों को ढूंढकर ग्रामीण क्षेत्रों में और दूसरे जिलों में भेजा, तबादलों के बाद सत्तासीन नेताओं के प्रति लोगों में आक्रोश

सरकार की ट्रांसफर पॉलिसी ने भाजपा के समर्थक और उनके नेताओं को ही मुसीबत में डाल दिया है। जिस बीकानेर शहर ने सांसद की जीत में बड़ी भूमिका निभाई और शहर के दोनों विधायक भाजपा की झोली में डाले उसी शहर को सरकार ने खाली कर दिया। यहां के कार्मिकों को शहर से बाहर भेज दिया। अब गुस्सा भाजपा नेताओं को सहना पड़ रहा है। सबसे ज्यादा परेशानी बिजली महकमें से है। दरअसल 14 जनवरी को जोधपुर विद्युत वितरण निगम की ओर से एक ट्रांसफर लिस्ट जारी हुई। उसमें मिनिस्ट्रियल स्टाफ को मानो ढूंढ-ढूंढकर शहर से बाहर भेजने का लक्ष्य बनाया गया हो। करीब 80 कार्मिक ऐसे हैं जिन्हें बीकानेर से फलौदी, पाली समेत तमाम ग्रामीण इलाकों में भेजा तो गया लेकिन उनके बदले बीकानेर को कार्मिक नहीं मिले। हालात ये हो गया कि बिजली महकमा ही पूरा खाली हो गया। शहर में ये चर्चा का विषय बना हुआ है। गुस्सा इतना बढ़ा कि मामला विधायक जेठानंद व्यास और सांसद अर्जुनराम मेघवाल तक पहुंचा। अखिल राजस्थान राज्य संयुक्त कर्मचारी महासंघ से जुड़ी जोधपुर विद्युत विरतण निगम लिमिटेड कर्मचारी मजदूर संघ ने सांसद और विधायक को साफ तौर पर कहा कि यूं लग रहा मानो कर्मचारियों को टारगेट बनाया गया है। कार्मिक इसे भूलने वाले नहीं है। ये हाल बिजली महकमा ही नहीं, तमाम विभागों का है जहां बीकानेर से बाहर कर्मचारी अधिकारी भेजे तो गए लेकिन उसकी जगह नहीं भरी गई। हटाया है तो किसी को भेजिए भी सही….. सरकार ने ट्रांसफर के नाम पर बड़े बड़े पदों पर अभियंताओं को हटा तो दिया लेकिन उसकी जगह किसी को नहीं भेजा। बीकानेर नगर निगम में अधीक्षण अभियंता का एक ही पद है। उस पर ललित ओझा पदस्थापित थे लेकिन उन्हें अब बीकानेर विकास प्राधिकरण में इसी पद पर भेजा गया लेकिन उनकी जगह यहां किसी को नहीं लगाया गया। जबकि निगम के अधीक्षण अभियंता के पास संभाग की तमाम निकायों को संभालने का जिम्मा है। पीएचईडी में अब तक अधीक्षण अभियंता रहे राजेश राजपुरोहित पदोन्नत होकर अतिरिक्त मुख्य अभियंता बन गए लेकिन अधीक्षण अभियंता पद पर किसी को नहीं भेजा गया। वो पद रिक्त है। बीडीए में अतिरिक्त मुख्य अभियंता का पद सृजित हो गया लेकिन वो पद भी नहीं भरा गया। ट्रांसफर पॉलिसी में मंत्रियों ने विधायकों की पूरी बात नहीं मानी। एक विधायक ने अगर 10 डिजायर भेजी तो उसमें से पांच ही मानी गई। सबसे कम सुनवाई स्वास्थ्य विभाग में हुई है। यहां विधायकों और मंत्रियों की डिजायर पर ध्यान नहीं दिया गया। चिकित्सा मंत्री वही है जिनके पास बीकानेर प्रभारी मंत्री का भी चार्ज है। स्वास्थ्य विभाग में एक अधिशासी अभियंता के पद पर रहे जेपी अरोडा को यहां से बाहर तो भेजा गया क्योंकि वे कांग्रेस कार्यकाल में सबसे पॉवरफुल अभियंताओं में रहे लेकिन उनकी जगह किसी को नहीं भेजा गया जबकि इसके लिए एक मंत्री और एक विधायक ने डिजायर भेजी हुई है।

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