विश्वास यदि दृढ़ हो जाए तो वह परमात्मा से जोड़ देता है

भास्कर न्यूज | बालोद महावीर मांगलिक भवन आमा पारा बालोद में नव दिवसीय श्रीमद् भागवत ज्ञान यज्ञ सप्ताह के तीसरे दिन आचार्य निरंजन महाराज ने बारह अवतार, सती चरित्र एवं शिव विवाह की कथा का उल्लेख किया। कहा कि माता पार्वती श्रद्धा की सजीव प्रतिमूर्ति हैं, जबकि भगवान शिव अटल विश्वास के प्रतीक हैं। मनुष्य तीन गुणों सात्विक, राजसी और तामसी से युक्त होता है, इसलिए उसकी श्रद्धा समय-समय पर बदलती रहती है, लेकिन विश्वास यदि दृढ़ हो जाए तो वह जीवन को परमात्मा से जोड़ देता है। श्रद्धा और विश्वास के बिना आत्मा के भीतर ईश्वर का साक्षात्कार संभव नहीं है। शिव विवाह की कथा का भावपूर्ण वर्णन करते हुए महाराज ने कहा कि संसार में जीव का अस्तित्व कन्या के समान है। जिस प्रकार कन्या अपने मायके से विदा होकर ससुराल जाती है और पति के बताए अनुसार सभी संबंधों और कर्तव्यों को स्वीकार करती है, उसी प्रकार जीव को भी इस भौतिक संसार से विदा होकर परमात्मा शिव की ओर अग्रसर होना चाहिए। तभी जीव और शिव का पवित्र मिलन संभव है। कथा के अगले प्रसंग में कहा कि मनुष्य को कभी भी अपने धन, पद, प्रतिष्ठा, रूप, रंग या यौवन का घमंड नहीं करना चाहिए। राजा दक्ष को अपने पद का अभिमान था, जिसके कारण उन्होंने भगवान शिव का अपमान किया और अंततः विनाश को प्राप्त हुए। सती माता ने अपने पिता दक्ष के यज्ञ में अपमान सहन न कर अपने शरीर का त्याग किया और पुनः हिमाचल के घर माता पार्वती के रूप में जन्म लेकर भगवान शिव को पति रूप में प्राप्त किया। यह प्रसंग त्याग, श्रद्धा और तपस्या की पराकाष्ठा को दर्शाता है। निरंजन महाराज कथा प्रवचन के दौरान उन्होंने अभिमान के दुष्परिणामों को बताते हुए कहा कि मनुष्य के जीवन में काम, क्रोध, लोभ, मोह, मद और मत्सर-ये छह विकार (षड्विकार) हैं, जिनका त्याग किए बिना प्रभु की प्राप्ति संभव नहीं है। उन्होंने कहा कि जब तक मनुष्य अपने जीवन से दुर्गुणों को नहीं हटाता और सद्गुणों को नहीं अपनाता, तब तक आत्मिक उन्नति संभव नहीं होती। अभिमान मनुष्य को अहंकार से भर देते हैं, जिससे उसका विवेक नष्ट हो जाता है। उन्होंने अभिमान को एक वृक्ष की संज्ञा देते हुए कहा कि अभिमान के वृक्ष में अभद्रता के पुष्प खिलते हैं और अंत में विनाश रूपी फल उत्पन्न होता है। इसलिए जीवन में कभी भी अभिमान नहीं करना चाहिए, बल्कि विनम्रता, प्रेम और करुणा को अपनाना चाहिए। इस अवसर पर कुमार साहू, श्रीनिवास, कमल उपाध्याय, बीपी साहू, हीरासिंह देशमुख, विजय ठाकुर, प्रमोद शर्मा, युधिष्ठिर शर्मा, नोहर शर्मा, नारायण सिंह ठाकुर, यूएस ठाकुर, पीएल देशमुख, ललित हरदेल सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे।

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