विश्व एड्स दिवस के अवसर पर सोमवार को रेलवे चिकित्सक डॉ. आर.आर. कुर्रे ने नरसिंहपुर स्थित रेलवे हॉस्पिटल और रेलवे स्टेशन पर एड्स जागरूकता कैंप का आयोजन किया। इस वर्ष की थीम ‘पुनर्विचार करें, पुनर्निर्माण करें, उठ खड़े हों… विघटन पर काबू पाना और एड्स प्रतिक्रिया में बदलाव लाना’ रखी गई, जिसका उद्देश्य एड्स समाप्ति की राह में आने वाली नई चुनौतियों का सामना करने के लिए वैश्विक समुदाय को एकजुट करना था। इस कार्यक्रम के तहत स्टेशन परिसर में अनाउंसमेंट के माध्यम से लोगों को जागरूक किया गया। स्वास्थ्य शिविर में रेलवे कर्मचारियों और अधिकारियों ने भाग लिया, जहां उन्होंने एचआईवी टेस्ट और डुओ टेस्ट कराए। शिविर में एचआईवी के शुरुआती लक्षणों जैसे बुखार, थकान, सिर दर्द, लिम्फ नोड्स में सूजन, मांसपेशियों में दर्द, गले में तकलीफ, उल्टी, दस्त और फ्लू जैसे लक्षणों के बारे में विस्तृत जानकारी दी गई। डॉ. कुर्रे ने बताया कि एचआईवी एक वायरस है, जबकि एड्स उस वायरस की अंतिम अवस्था है। यदि समय पर इलाज न मिले तो एचआईवी एड्स में बदल जाता है। उन्होंने एड्स के उपचार में एंटी रेट्रो वायरल थेरेपी (ART) की महत्वपूर्ण भूमिका पर भी प्रकाश डाला। उन्होंने एड्स फैलने के प्रमुख कारणों में असुरक्षित यौन संबंध, मल्टी-पार्टनर, नशीली दवाओं में उपयोग होने वाली साझा सिरिंज, संक्रमित ब्लड ट्रांसफ्यूजन और संक्रमित गर्भवती महिला से बच्चे में संक्रमण को शामिल बताया। डॉ. कुर्रे ने यह भी स्पष्ट किया कि हाथ मिलाने, गले लगाने या साथ बैठकर भोजन करने से एड्स नहीं फैलता। उन्होंने मरीजों के साथ भेदभाव न करते हुए सम्मानपूर्वक व्यवहार करने की अपील की। शिविर में यह सुझाव भी दिया गया कि विवाह से पहले दोनों पक्षों को एचआईवी टेस्ट अवश्य करवाना चाहिए, ताकि आने वाली पीढ़ी इस संक्रमण से सुरक्षित रह सके।


