विश्व शांति के लिए भोपाल में हुआ सामूहिक हीलिंग सत्र:मिंटो हॉल में बना रिकॉर्ड, 2,500 से ज्यादा हीलर्स एक साथ जुड़ें

भोपाल के मिंटो हॉल में विश्व शांति के लिए समारोह हुआ। इसमें देश-विदेश के 1,000 से अधिक हील्स ऑफलाइन और 1,500 से अधिक प्रतिभागी ऑनलाइन एक ही समय पर जुड़े। इसका उद्देश्य एक विश्व शांति के लिए सामूहिक हीलिंग था। कार्यक्रम में मंत्रजाप और साउंड हीलिंग के संयुक्त सत्र आयोजित हुआ। आयोजन में नीम करौली बाबा के पौत्र भी शामिल हुए थे। वैश्विक संघर्षों के बीच शांति की पुकार
इस अवसर पर वक्ताओं ने रूस-यूक्रेन युद्ध, इजराइल-फिलिस्तीन संकट, व्यापार विवादों और मानवीय संकटों के बीच विश्व शांति की तत्काल आवश्यकता पर जोर दिया। जिसका संदेश स्पष्ट था, जब ऊर्जा एक दिशा में प्रवाहित होती है, तो परिवर्तन अनिवार्य हो जाता है। समारोह में अतिरिक्त मुख्य सचिव शिव शेखर शुक्ला, उद्योगपति दिलीप सूर्यवंशी (एमडी, दिलीप बिल्डकॉन), देवेंद्र जैन (सीईओ, दिलीप बिल्डकॉन), संजीव अग्रवाल (सीएमडी, सेज ग्रुप), दुबई स्पोर्ट्स काउंसिल के प्रतिनिधि, बॉलीवुड फिल्ममेकर राकेश रोशन, गायक ब्रिजेश शांडिल्य, अभिनेता बलराज स्याल और रेवा कुरसे समेत कई प्रतिष्ठित हस्तियां मौजूद रहीं। हनुमान चालीसा’ से गूंजा हॉल कार्यक्रम की शुरुआत दीप प्रज्वलन से हुई, जिसने एकता और प्रकाश का संदेश दिया। इसके बाद हनुमान चालीसा के सामूहिक जाप से पूरा मिन्टो हॉल दिव्यता से भर गया। मुख्य सत्र में अंतरराष्ट्रीय योग विशेषज्ञ आरविका गुप्ता ने प्रतिभागियों को योग, ध्यान और साउंड हीलिंग की ऊर्जा का अनुभव कराया। उन्होंने कहा, जब मन, शरीर और आत्मा एक दिशा में संतुलित होते हैं, तभी वास्तविक शांति संभव होती है। कार्यक्रम के समापन पर 100 से अधिक हील्स ने हीलिंग फॉर वर्ल्ड पीस के सामूहिक संकल्प के साथ साउंड हीलिंग सत्र किया। इस क्षण ने आशा, एकता और सार्वभौमिक कल्याण का संदेश समूचे विश्व तक पहुंचाया। इस अवसर पर यह भी घोषणा की गई कि हर साल 5 अक्टूबर को ‘विश्व हीलिंग दिवस’ के रूप में मनाया जाएगा, जिससे यह ऊर्जा और शांति का संदेश एक स्थायी वैश्विक परंपरा बन सके। केवल आयोजन नहीं, मानवता का आंदोलन
आयोजन के प्रेरक आयुष गुप्ता ने कहा कि यह केवल एक कार्यक्रम नहीं, बल्कि मानवता के लिए एक आंदोलन है। जब हजारों लोगों ने एक स्वर में शांति की ऊर्जा समर्पित की, तो पूरे विश्व के कंपन बदल गए। यह ऐतिहासिक प्रयास आने वाली पीढ़ियों के लिए मील का पत्थर सिद्ध होगा।

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