सीहोर स्थित वीआईटी यूनिवर्सिटी के कैंपस मंगलवार-बुधवार की दरमियानी रात हुई तोड़फोड़ और आगजनी के मामले में आष्टा थाने में दो एफआईआर दर्ज कराई गई हैं। पहली एफआईआर- 26 नवंबर को दोपहर 3:30 बजे छात्रों की ओर से दर्ज कराई गई है। इसमें बताया गया है कि मंगलवार रात 11:30 बजे वीआईटी हॉस्टल के वार्डन संतोष कुमार पांडे और उनके साथ मौजूद गार्ड्स ने छात्रों को गालियां दी, मारपीट की। वार्डन ने छात्रों को भविष्य खराब कर देने की धमकी दी। दूसरी एफआईआर- अपने ही कैंपस में पढ़ने वाले छात्रों पर वीआईटी ने दंगा, बलवा, संपत्ति को नुकसान की धाराओं में केस दर्ज कराया गया। वीआईटी के रजिस्ट्रार केके नायर ने तीन से चार हजार अज्ञात छात्रों के खिलाफ कैंपस में आगजनी और तोड़फोड़ कर संस्थान को नुकसान पहुंचाने की एफआईआर दर्ज कराई है। इसमें बताया गया है कि ये छात्र कैंपस में मौजूद 5 कैंटीनों में रखे रुपए भी ले गए। वीआईटी ने बताया कि एक बस, तीन कार को पूरी तरह जलाया गया। एक कार, तीन बस, एक इलेक्ट्रिक ऑटो और एक इलेक्ट्रिक बग्घी में तोड़फोड़ की गई। छात्रों ने भी दंगा, शत्रुता बढ़ाने, आपराधिक धमकी से जुड़ी धाराओं में केस दर्ज कराया…
बीकॉम फर्स्ट ईयर के छात्र की शिकायत पर वार्डन प्रशांत कुमार पांडेय और चार-पांच अज्ञात लोगों के खिलाफ छात्रों से गाली गलौज, भविष्य बर्बाद करने की धमकी देने और मारपीट करने का प्रकरण दर्ज कराया है। प्रशांत कुमार पांडेय के खिलाफ बीएनएस की धारा 191(2),190, 296 ए, 115 (2) और 351 (3) के तहत केस दर्ज। जांच रिपोर्ट- वीआईटी की कार्रवाई मनमानी वाली, सीएमएचओ को दो घंटे गेट पर रोका था हंगामे और तोड़फोड़ की जांच के लिए बनाई गई जांच कमेटी ने गुरुवार को विस्तृत रिपोर्ट मप्र निजी विवि विनियामक आयोग को सौंप दी। सूत्रों के अनुसार, समिति ने विवि प्रबंधन की कार्यशैली को ‘स्वेच्छाचारी, मनमानी और भय पैदा करने वाली’ बताया है। हमीदिया कॉलेज के प्राचार्य डॉ. अनिल शिवानी, एमवीएम कॉलेज के प्रो. संजय दीक्षित व जीएमसी के प्रो. लोकेंद्र दवे की कमेटी ने कहा है कि पूरा घटनाक्रम प्रबंधन की लापरवाही का नतीजा है। विवि में 15,000 छात्र पढ़ते हैं, जिनमें से 12,000 छात्र 8 हॉस्टलों में रहते हैं। 1. खराब खाना और गंदा पानी : 5 मेस हैं। खाने की गुणवत्ता खराब थी। पानी से बदबू आ रही थी।
2. पीलिया फैलने पर लापरवाही: 14 से 24 नवंबर के बीच 35 छात्र-छात्राएं पीलिया से बीमार मिले। लेकिन इसका कोई रिकॉर्ड नहीं दिखा सके।
3. जांच से बचने की कोशिश : जब सीहोर के मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी निरीक्षण के लिए कैंपस पहुंचे तो उन्हें गेट पर 2 घंटे रोका गया।
4. छात्रों को डराकर चलाना : पानी व खाने की शिकायत करने पर छात्रों का आई-कार्ड जब्त किया जाता था। परीक्षा में बैठने और प्रैक्टिकल नंबरों की धमकी दी जाती थी। बीमार छात्रों को अस्पताल के बजाय घर भेजते थे।
5. छात्रों से मारपीट : छात्रों से मारपीट के वीडियो सामने आए।
6. घटना बढ़ने पर देर से पुलिस बुलाई : पुलिस को रात 2 बजे बुलाया गया, जब हालात बिगड़ चुके थे। तब तक कई जगह तोड़फोड़, आगजनी हो चुकी थी। इधर, वीआईटी पहुंची प्रभारी मंत्री, मेस-पानी पर नाराजगी सीएम डॉ. मोहन यादव के निर्देश पर गुरुवार को जिले की प्रभारी कैबिनेट मंत्री कृष्णा गौर वीआईटी कॉलेज कैंपस पहुंचीं। उन्होंने मेस, रसोईघर, पेयजल व्यवस्था, स्टोरेज टैंक, शौचालय और हॉस्टल परिसर की सफाई का निरीक्षण किया। कई जगह अव्यवस्था देखकर नाराजगी जताई। कहा कि विद्यार्थियों की सेहत से कोई खिलवाड़ बर्दाश्त नहीं होगा। इसके बाद उन्होंने कॉलेज प्रबंधन, जिला प्रशासन और विभागीय अधिकारियों की बैठक ली। मीडिया से बातचीत में गौर ने छात्रा नेहा की मौत पर कहा कि उसे पहले से टीबी थी। माता-पिता के आग्रह पर कॉलेज ने उसकी फीस माफ कर दी है। फैकल्टी के ऑर्गन के सैंपल फोरेंसिक लेबोरेट्री भोपाल भेजे गए
एक दिन पहले, बुधवार को चाणक्यपुरी में रहने वाले संग्राम केसरी दास, जो वीआईटी में फैकल्टी के रूप में कार्यरत थे, का शव उनके मकान में मिला था। वे यहां अकेले रहते थे। जिला अस्पताल में उनका पीएम किया गया। जिला अस्पताल में पदस्थ डॉ. आर. के. वर्मा ने बताया कि प्रारंभिक जांच रिपोर्ट में मौत का कारण स्पष्ट नहीं हो सका। इसलिए उनके अंतर्गत अंगों (ऑर्गन) और ब्लड सैंपल को जांच के लिए फोरेंसिक लेबोरेट्री भोपाल भेजा गया है। वहाँ से रिपोर्ट आने के बाद ही मृत्यु के सही कारण का पता चल सकेगा।


