भास्कर न्यूज | अमृतसर आम आदमी पार्टी सरकार के वीवीआईपी कल्चर से अमृतसर के लोग परेशान हैं। इसका सीधा असर अब तहसीलों में रजिस्ट्री कराने वालों पर भी पड़ रहा है-चाहे वे स्थानीय हों या दूसरे जिलों, राज्यों या विदेशों से आए हों। हर महीने किसी न किसी वीवीआईपी का दौरा तय रहता है, जिससे अफसरों की ड्यूटी लग जाती है, रूट डायवर्जन होता है, दुकानें बंद करवाई जाती हैं और शहर में जाम लग जाता है। अब शुक्रवार को सीएम भगवंत मान नशा मुक्ति अभियान के तहत खालसा कॉलेज आ रहे हैं, इस वजह से शुक्रवार को रजिस्ट्री नहीं होगी। सरकार ने दो तहसीलों में एक सीट पर दो-दो सब-रजिस्ट्रार तैनात किए हैं ताकि काम में तेजी आए, लेकिन जब सभी को वीवीआईपी ड्यूटी पर लगा दिया जाए तो फिर जनता को क्या फायदा? पहले तहसीलदार रजिस्ट्री का काम संभालते थे, अब सब-रजिस्ट्रार को जिम्मेदारी दी गई है। लेकिन वीवीआईपी ड्यूटी के नाम पर बार-बार तैनाती बदल दी जाती है और रजिस्ट्री का काम रुक जाता है। ^सीनियर एडवोकेट महिंदरपाल गुप्ता का कहना है कि रजिस्ट्री करने वाले अफसरों को वीवीआईपी ड्यूटी से मुक्त रखना चाहिए या उनके लिए कोई विकल्प तय करना चाहिए। करोड़ों की डील होती है, लोग दूसरे राज्यों और विदेशों से आते हैं, वापसी की टिकटें बुक होती हैं। रजिस्ट्री रुकने से लोगों को बड़ा नुकसान होता है। एक दिन पहले मैसेज भेजने से कुछ नहीं होगा, यह प्रशासनिक लापरवाही है। राज्यपाल के 8 अप्रैल के नशा मुक्ति अभियान दौरे पर भी सब-रजिस्ट्रारों की वीवीआईपी ड्यूटी लगाई गई थी। तब तहसील-वन में रजिस्ट्री का काम 6 घंटे लेट शुरू हुआ, जबकि बाकी तहसीलों में भी चार घंटे तक लोग परेशान होते रहे। बार-बार ऐसा होने से लोग करोड़ों रुपए की डील होने के बावजूद बिना रजिस्ट्री कराए लौटने को मजबूर हो जाते हैं। ^सीनियर एडवोकेट भूषण अग्रवाल कहना है कि हर वीवीआईपी मूवमेंट पर यही हाल होता है। जाम लग जाता है और तहसीलों में अफसर नहीं मिलते। एक दिन पहले रजिस्ट्री बंद करने का मैसेज देने से क्या फायदा, जब लोगों को इसकी भनक ही न लगे? बेहतर है कि ऐसे दिन को सरकारी अवकाश घोषित कर दिया जाए ताकि लोग परेशान न हों। सीएम के कार्यक्रम से ठीक एक दिन पहले तहसील-1 और सब-रजिस्ट्रार-3 कार्यालय से वसीका नवीसों को सूचना भेज दी गई कि 2 मई को कोई रजिस्ट्री नहीं होगी। इस आदेश से लोगों को आखिरी वक्त में मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है। हैरानी की बात यह है कि इतने अफसरों की फौज के बावजूद रजिस्ट्री जैसे जरूरी कामों के लिए कोई वैकल्पिक इंतजाम नहीं किए जाते।


