भगवान श्रीकृष्ण के जन्मोत्सव के पश्चात ब्रज में अनेक दिव्य लीलाएं हुईं। भगवान ने मात्र 14 दिनों में पूतना का वध कर उसे मोक्ष प्रदान किया। इससे यह संदेश मिलता है कि जो भगवान का भजन करते हैं, उन्हें तो मुक्ति मिलती ही है, साथ ही जिन्हें भगवान स्वयं मारते हैं, वे भी उनके द्वारा मुक्त हो जाते हैं। यह बात खेल परिसर के बाजू वाले मैदान में चल रही श्रीमद् भागवत कथा के पांचवें दिन संत चिन्मयानंद बापू ने भगवान श्रीकृष्ण की बाल एवं किशोर लीलाओं का भावपूर्ण वर्णन करते हुए जीवन के गूढ़ संदेशों को सरल शब्दों में प्रस्तुत करते हुए कही। बापू ने माखन चोरी की लीला का वर्णन करते हुए कहा कि यह लीला हमें मित्रों के साथ समान व्यवहार करने की शिक्षा देती है। जीवन में ऊंच-नीच, बड़ा-छोटा का भाव त्यागकर सभी के साथ समानता का भाव रखना चाहिए। गोपियों के वस्त्र हरण की लीला को उन्होंने अविद्या के नाश का प्रतीक बताया और कहा कि शास्त्रों में नदी या सरिता में नग्न स्नान वर्जित है। भगवान ने गोपियों की इसी अविद्या का हरण किया। कालिया मर्दन लीला के माध्यम से बापू ने अहंकार त्यागने की सीख दी। कालिया नाग ने यमुना जल को दूषित कर दिया था और अपने बल पर अभिमान कर बैठा था, जिसे भगवान ने समाप्त किया। गोवर्धन लीला का वर्णन करते हुए उन्होंने कहा कि इंद्र अपने पूजन के कारण अभिमानी हो गए थे। भगवान ने गोवर्धन पूजा का संदेश देकर प्रकृति, वृक्षों और गौ माता की महत्ता को बताया। पर्यावरण संरक्षण का यह संदेश आज भी प्रासंगिक है। कथा में कैबिनेट मंत्री गोविंद सिंह राजपूत एवं भाजपा जिला अध्यक्ष श्याम तिवारी ने व्यास पीठ पर बापू को शॉल-श्रीफल भेंट कर आशीर्वाद लिया और कथा श्रवण की। कथा में मुख्य यजमान प्रतिभा अनिल तिवारी, शिवशंकर मिश्रा, मुख्य सह यजमान शिल्पा नीरज तिवारी, अनुश्री जैन, उमेश मिश्रा, सह यजमान के रूप में अजय श्रीवास्तव, पूर्व विधायक सुनील जैन, राजू विभाग प्रचारक, सतीष जिला कार्यवाहक, राजकुमार अग्निहोत्री, रत्नेश राजपूत, गोलू रिछारिया, रामवतार पांडे, कमल तिवारी, मुन्ना पटेरिया, सीताराम मिश्रा, अशोक उपाध्याय, रामजी दुबे, तरुण बडोनिया, लालू मेथवानी, संतोष पाण्डेय, डॉ. सुखदेव मिश्रा, भरत तिवारी, पप्पू तिवारी, अंकित दुबे, पलाश चोबै, असंख्य दुबे, बाटू दुबे, हरीराम सिंह, सुरेन्द्र तिवारी, रवि सिंह ठाकुर आदि उपस्थित रहे।


