भास्कर न्यूज | अमृतसर ज्योतिष शास्त्र में अगर कोई ग्रह सबसे ज्यादा रहस्यमय माना गया है, तो वह केतु है। उसका अपना न शरीर है और न स्पष्ट रूप है, फिर भी उसका असर जीवन को भीतर तक झकझोर देता है। कहा जाता है कि जहां राहु भोग, लालसा और सांसारिक मोह का प्रतीक है, वहीं केतु त्याग, विरक्ति और मोक्ष की ओर ले जाने वाला ग्रह है। यह ग्रह स्वयं राक्षस योनि से उत्पन्न हुआ, वही मुक्ति का मार्गदर्शक भी बन गया। पंडित राम अवतार के अनुसार साल 2026 में केतु की स्थिति कई लोगों के लिए जरूरी है। राक्षस होते हुए भी मोक्ष का कारक क्यू: पंडित के अनुसार केतु की राक्षसी उत्पत्ति नकारात्मक नहीं, बल्कि भौतिक भ्रम और अहंकार का प्रतीक मानी जाती है। अमृत के प्रभाव के कारण केतु सांसारिक सुखों से ऊपर उठने की क्षमता देता है। वृश्चिक राशि वालों के लिए केतु का यह गोचर करियर के लिहाज से बेहद अहम साबित हो सकता है। नई नौकरी के योग बन रहे हैं जो लोग साझेदारी में काम करते हैं, उन्हें अपने पार्टनर का पूरा सहयोग मिलेगा। यह समय करियर को नई दिशा देने, प्रमोशन और जिम्मेदारी बढ़ने का संकेत देता है। भाई-बहनों का सहयोग मिलेगा और जीवन साथी के साथ मिलकर संपत्ति, बड़े निवेश की योजना बन सकती है। कार्यस्थल पर सम्मान बढ़ेगा और वैवाहिक जीवन में सुख-शांति बनी रहेगी। पंडित राधे श्याम के अनुसार राहु बांधता है, केतु मुक्त करता है। राहु हमें दुनिया से जोड़ता है और महत्वाकांक्षा देता है। जबकि केतु उन बंधनों को काटता है। साल 2026 में केतु हमें यह संदेश देगा है कि सब कुछ पा लेने के बाद भी अगर शांति नहीं है, तो रास्ता बाहर नहीं, अंदर है। यही कारण है कि केतु को भय का नहीं बल्कि बोध का ग्रह माना गया है। पंडित राम अवतार के मुताबिक पुराणों में समुद्र मंथन के बाद जब देवताओं में अमृत का वितरण हो रहा था, तब स्वर्भानु नामक दैत्य छल से देवताओं की पंक्ति में बैठ गया। इसी दौरान उसने अमृत पी लिया। सूर्य और चंद्रदेव ने उसे पहचान लिया। भगवान विष्णु ने तुरंत सुदर्शन चक्र से उसका सिर धड़ से अलग कर दिया। सिर वाला भाग बना राहु और धड़ वाला भाग केतु कहलाया। यहीं से केतु को ‘राक्षस ग्रह’ कहा गया, केतु ने भी अमृत का अंश ग्रहण किया था। यही कारण है कि उसमें दैत्यत्व के साथ दैवीय चेतना भी समाहित हो गई।


