वेरिटास फाइनेंस ने अपने ₹2,800 करोड़ के IPO को टाला:अमेरिकी टैरिफ से MSME पर होने वाले असर की वजह से कंपनी ने यह फैसल किया

रिटेल फाइनेंस पर फोकस करने वाली नॉन-बैंकिंग फाइनेंशियल कंपनी (NBFC) वेरिटास फाइनेंस ने अपने ₹2800 करोड़ के IPO के प्लान को फिलहाल टाल दिया है। मनीकंट्रोल की रिपोर्ट्स के मुताबिक, कंपनी ने यह फैसला अमेरिकी टैरिफ के चलते एक्सपोर्ट पर फोकस रखने वाले MSME के प्रभावित होने की आशंका के चलते लिया है। अमेरिका ने भारतीय सामानों पर 25% टैरिफ लगाया था, लेकिन रूस से तेल की खरीदारी के चलते 25% का एडिशनल टैरिफ लगा दिया। यानी भारतीय सामानों पर अब 50% टैरिफ है। 25% का एडिशनल टैरिफ 27 अगस्त को सुबह 9.31 बजे से प्रभावी है। वहीं 25% का रेसिप्रोकल टैरिफ तो पहले ही 1 अगस्त से लागू हो चुका है। 50% टैरिफ ने MSME के लिए माहौल निगेटिव किया सूत्रों ने बताया कि भारतीय सामानों पर 50% टैरिफ ने MSME के लिए माहौल निगेटिव कर दिया है। इसकी वजह यह है कि ये बड़ी संख्या में एक्सपोर्ट पर निर्भर हैं। खासतौर से उन सेक्टर्स में जो टैरिफ से बुरी तरह प्रभावित हो सकते हैं जैसे कि टेक्सटाइल्स, जेम्स एंड ज्वैलरी, ऑटो कंपोनेंट्स, केमिकल्स और सी फूड सेक्टर हैं। रेटिंग एजेंसी क्रिसिल ने रिपोर्ट में बताया था कि अमेरिकी टैरिफ के चलते सबसे ज्यादा असर टेक्सटाइल्स, जेम्स एंड ज्वैलरी और सी फूड इंडस्ट्रीज पर होगा। जिनकी अमेरिका को भारतीय एक्सपोर्ट में 25% हिस्सेदारी है। MSME की इन सेक्टर्स में 70% से ज्यादा हिस्सेदारी है। क्रिसिल की रिपोर्ट के मुताबिक, इन सबके अलावा केमिकल सेक्टर के भी प्रभावित होने की आशंका है। अमेरिकी टैरिफ के चलते कंपनी के IPO का प्लान टला सूत्रों के मुताबिक, अमेरिकी टैरिफ के चलते कंपनी के IPO का प्लान टल गया है। कंपनी को वित्त वर्ष की दूसरी छमाही यानी अक्टूबर 2025 से मार्च 2026 के बीच माहौल सुधरने की उम्मीद है और तब IPO लाने के प्लान पर फिर से विचार हो सकता है। कंपनी ने IPO का DRHP जुलाई में फाइल किया था सूत्रों के मुताबिक, कंपनी ने IPO का ड्राफ्ट रेड हेरिंग प्रॉस्पेक्टस (DRHP) पिछले महीने जुलाई के आखिरी में फाइल किया था और इस महीने अगस्त में IPO लाने की प्लानिंग की थी। वहीं वेरिटास को अप्रैल महीने में सेबी से IPO लाने की मंजूरी मिली थी, जो एक साल तक के लिए वैलिड है। IPO से कंपनी 2,800 करोड़ रुपए जुटाना चाहती है इस IPO से कंपनी 2,800 करोड़ रुपए जुटाना चाहती है। पब्लिक ऑफरिंग में 600 करोड़ रुपए के इक्विटी शेयरों का एक नया इश्यू और 2,200 करोड़ रुपए तक के इक्विटी शेयरों की सेल्स का ऑफर यानी OFS शामिल है, जिनमें से हर एक इक्विटी शेयर की फेस वैल्यू 10 रुपए है। IPO में एलिजिबल एम्प्लॉइज के लिए शेयरों का रिजर्वेशन भी शामिल है। IPO से जुटाए गए फंड का क्या यूज करेगी कंपनी? IPO से जुटाए गए फंड का यूज कंपनी का कैपिटल बेस बढ़ाने के लिए किया जाएगा। इसके अलावा बिजनेस से जुड़ी जरूरतों और लेंडिंग फैसिलिटीज को पूरा करने के लिए भी कंपनी फंड का इस्तेमाल करेगी। 2015 में स्थापित वेरिटास फाइनेंस क्या काम करती है? 2015 में स्थापित वेरिटास फाइनेंस शहरों और सेमी-अर्बन यानी अर्द्ध-शहरी इलाकों में माइक्रो, स्मॉल और मीडियम एंटरप्राइजेज (MSME) को वर्किंग कैपिटल लोन मुहैया कराती है। सेल्फ एम्प्लॉयड इंडिविजुअल की फाइनेंशियल जरूरतों को पूरा करती है। इसके अलावा कंपनी स्मॉल बिजनेस लोन्स, होम लोन्स और यूज्ड कॉमर्शियल व्हीकल लोन्स समेत कई फाइनेंशियल प्रोडक्ट्स भी प्रोवाइड करती है। कंपनी की 10 राज्यों और एक केंद्र शासित प्रदेश में 424 ब्रांच हैं। ICICI सिक्योरिटीज-HDFC बैंक लीड मैनेजर चुने गए वेरिटास फाइनेंस को रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया यानी RBI ने ‘NBFC-मिडिल लेयर’ के रूप में क्लासिफाई किया है। IPO के लिए ICICI सिक्योरिटीज, HDFC बैंक, जेफरीज इंडिया, कोटक महिंद्रा कैपिटल कंपनी और नुवामा वेल्थ मैनेजमेंट को लीड मैनेजर चुना गया है। केफिन टेक्नोलॉजीज इस इश्यू के लिए रजिस्ट्रार है। वेरिटास की 2022 से 2024 तक 61.76% की CAGR क्रिसिल MIA रिपोर्ट के अनुसार, वेरिटास की फाइनेंशियल ईयर 2022 से 2024 तक 61.76% की कंपाउंड एनुअल ग्रोथ रेट (CAGR) है। इसके साथ ही वेरिटास को अपनी कैटेगरी में सबसे तेजी से बढ़ने वाली NBFC के रूप में मान्यता प्राप्त है। वित्त वर्ष 2025 में कंपनी की टोटल इनकम 39.5% बढ़ी

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