शहर के साइबर थाने में पिछले एक महीने में वॉट्सएप हैक होने की कुल 51 शिकायतें पहुंची हैं। शिकायत करने वाले ज्यादा कारोबारी या अफसर हैं। दरअसल, साइबर क्रिमिनल लोगों को ठगने के लिए वॉट्सएप हैकिंग कर रहे हैं। लुधियाना में इस तरह के मामले पिछले कुछ हफ्तों से अचानक बढ़े हैं। हैकर्स पहले किसी ऑनलाइन डिलीवरी कंपनी के कर्मचारी के नाम से कॉल करवाते हैं और फिर पीड़ित को एक खास नंबर डायल करने के लिए कहते हैं। जैसे ही व्यक्ति वह नंबर डायल करता है, उसके फोन का डेटा हैकर्स के पास पहुंच जाता है। इसके बाद हैकर्स पीड़ित के वॉट्सएप अकाउंट को लॉगिन करके पढ़ना शुरू कर देते हैं। बिजनेस से जुड़ी डिटेल पता करने के बाद उसी वॉट्सएप अकाउंट से वे पीड़ित की कंपनी के कर्मचारियों को मैसेज भेजते हैं और कुछ अकाउंट में रकम ट्रांसफर करा लेते हैं। कर्मचारी समझ नहीं पाते कि ये मैसेज किसी और व्यक्ति ने डायरेक्टर के वॉट्सएप अकाउंट को हैक करके किया है। इस तरह की ठगी के ज्यादातर मामले शनिवार-रविवार को सामने आए हैं। जानकारों का कहना है कि ठगी होने के बाद पीड़ित व्यक्ति बैंक में फोन करके ट्रांसफर की कई रकम रुकवाना चाहे तो सफल नहीं हो पाता, क्योंकि उस दिन बैंक बंद रहते हैं। इतने समय में ठगों को वह पैसा आगे अलग-अलग अकाउंट में ट्रांसफर करने का समय मिल जाता है। एक्सपर्ट व्यू… सबसे ज्यादा हैकिंग उन नंबरों की, जिनसे ऑनलाइन शॉपिंग होती है साइबर एक्सपर्ट अनूप गुप्ता कहते हैं कि जो लोग ऑनलाइन शॉपिंग करते हैं, उनके वॉट्सएप नंबरों पर हैकर आसानी से अटैक करते हैं। इसमें होता यह है कि सबसे पहले आपको ऑनलाइन डिलीवरी कंपनी के नाम पर किसी व्यक्ति का फोन आता है। वह आपसे पूछता हैं कि कुछ समय पहले आपने ऑर्डर किया था, क्या वो आपको मिल गया। हमारी सर्विस कैसी थी… वगैरह-वगैरह। उसके बाद आपको ‘*#21#’ कोड भेजकर डायल करने के लिए कहेगा। डायल करते ही फोन कॉल फॉरवर्ड होकर हैकर के पास पहुंच जाती है। फिर हैकर अपने पास वॉट्सएप को लॉगिन करता है, जिसके लिए ओटीपी वह कॉल के जरिए हासिल कर लेता है। लेकिन, इसके बारे में संबधित व्यक्ति को पता नहीं चलता। इसलिए सबसे जरूरी बात ये है कि हमें किसी भी लिंक को कतई क्लिक नहीं करना है। 3. स्माइली स्कैम, ऐसी कुल 15 शिकायतें ऐसे मामलों में हैकर डीपी (डेस्कटॉप पिक्चर) पर व्यक्ति का फोटो लगाकर उसके फोन कॉन्टेक्ट लिस्ट के लोगों को मैसेज कर रकम मांगते हैं। कुछ जानकार लोग सच मानकर रकम बताए गए अकाउंट में जमा भी कर देते हैं। बाद में जब उन्हें पता चलता है कि जिस व्यक्ति को रकम भेजी है, उसे मांगी ही नहीं थी। लेकिन, तब तक केस दर्ज कराने में देरी हो जाती है। ये रकम कभी रिकवर नहीं हो पाती। केस: 17 दिसंबर को कपड़ा व्यापारी सोनू ने शिकायत दी थी कि उसके परिजनों के वॉट्सएप नंबर पर किसी ने मैसेज कर रुपयों की मांग की है। उस अकाउंट पर फोटो सोनू की थी। लेकिन, नंबर सोनू का नहीं था। सोनू के परिजन ने कुछ रुपए भेज भी दिए। लेकिन, जब रकम वापस मांगी तो पता चला कि सोनू ने तो रुपए मांगे ही नहीं थे। 2. फेक इन्वेस्टमेंट लिंक, कुल 26 शिकायतें ऐसे मामलों में हैकर पहले वॉट्सएप का एक्सेस लेकर उस अकाउंट पर नजर रखते हैं। पूरी जानकारी जुटाने के बाद हैकर उसके नंबर से कॉन्टेक्ट लिस्ट में दर्ज लोगों को मैसेज कर लिंक भेजता है। लिंक में उनके कारोबार में इन्वेस्ट करने के बारे में जानकारियां होती हैं। जानकारी देखने के लिए लोग उस लिंक पर क्लिक कर लेते हैं, क्योंकि वह लिंक जानकार के अकाउंट से आया होता है। लिंक पर क्लिक करते ही उनके खातों से रकम कटने लगती है। केस: 15 दिसंबर को एक प्रॉपर्टी डीलर साइबर सेल में शिकायत लेकर पहंुचा था। उसने बताया कि उसके कॉन्टेक्ट लिस्ट में दर्ज लोगो को एक मैसेज गया है। उसके साथ एक लिंक भी है। एक परिचत ने जब लिंक पर क्लिक किया तो उसके अकाउंट से 7 हजार निकल गए। 1. बिजनेस प्रोफाइल मिसयूज, 16 शिकायतें ऐसे मामलों के शिकार कारोबारी होते हैं। पहले उनका वॉट्सएप अकाउंट हैक कर नजर रखी जाती है। फिर फोन से कारोबार से जुड़े दस्तावेज चुरा लिए जाते हैं। उन्हीं दस्तावेज के आधार पर ठगी की जाती है। केस: 23 दिसंबर को होजरी कंपनी के डायरेक्टर श्रेणिक जैन ने शिकायत दी। जैन के वॉट्सएप अकाउंट से सीए को मैसेज भेजा गया था। इसमें कहा था कि एक अकाउंट में 86 लाख रु. भेज दें। सीए ने रकम ट्रांसफर कर दी। बाद में सीए उनके कैबिन में गया तो पूछा- क्या वो रकम पहुंच गई? इस पर जैन चौंक गए और कहा कि मैंने रकम ट्रांसफर करने को नहीं कहा था। साइबर एक्सपर्ट टीम ने जांच कर तो पता चला कि जैन का वॉट्सएप अकाउंट हैक था।


