झारखंड हाईकोर्ट में गुरुवार को शहर की जर्जर सड़कों की मरम्मत और जलजमाव के मामले पर दाखिल जनहित याचिका पर सुनवाई हुई। चीफ जस्टिस तरलोक सिंह चौहान और जस्टिस राजेश शंकर की अदालत ने जर्जर सड़क की मरम्मत और जलजमाव दूर नहीं होने पर नाराजगी जताई। सेवा सदन रोड में विद्युत सब स्टेशन के पास भारी जल जमाव होने और सड़क की मरम्मत नहीं होने पर अदालत ने कारण पूछा। बिजली विभाग के अधिकारियों ने बताया कि एक साल पूर्व ही रांची नगर निगम को सड़क बनाने के लिए पत्र लिखा गया था। इस पर अदालत ने नाराजगी जताते हुए कहा मौखिक कहा कि विभाग एक दूसरे को सिर्फ पत्र ही लिखेंगे या काम भी करेंगे। इस पर सरकार की ओर से बताया गया कि सड़क निर्माण के लिए टेंडर निकाला गया है। सड़क और नाली का निर्माण जल्द ही करा दिया जाएगा। इस पर अदालत ने पूछा कि कब तक सड़क और नाली बन जाएगी। इसकी समय सीमा कब तक निर्धारित की गई है। सरकार की ओर से कोई स्पष्ट जवाब नहीं दिया जा सका। इसके बाद अदालत ने सरकार को सड़क मरम्मत के लिए निकाले गए टेंडर की कॉपी प्रस्तुत करने का निर्देश दिया। मामले की अगली सुनवाई 16 सितंबर को होगी। हाईकोर्ट ने सरकार को दिया निर्देश मोटर वाहन नियमों का हो पालन… अभियान चलाकर वाहनों से हटाएं प्रेशर हार्न, नेम प्लेट झारखंड हाई कोर्ट में गुरुवार को वाहनों से काला शीशा, प्रेशर हॉर्न, नेम प्लेट, राजनीतिक दलों का झंडा हटाने की मांग को लेकर दाखिल जनहित याचिका पर सुनवाई हुई। चीफ जस्टिस तरलोक सिंह चौहान और जस्टिस राजेश शंकर की अदालत ने सुनवाई के दौरान सरकार को वाहनों से प्रेशर हार्न, नेम प्लेट सहित झंडा हटाने का निर्देश दिया। अदालत ने रांची के ट्रैफिक एसपी को अदालत के निर्देश का पालन कर चार सप्ताह में प्रगति रिपोर्ट पेश करने को कहा है। सुनवाई के दौरान रांची के ट्रैफिक एसपी कोर्ट में मौजूद थे। अनधिकृत झंडा हटाने का निर्देश अदालत ने वाहनों पर राजनीतिक दलों, धार्मिक और किसी प्रकार के अनधिकृत झंडा तत्काल हटाने और ध्वज संहिता के प्रावधानों का विधिवत पालन करने का निर्देश दिया है। इसके साथ ही प्रेशर हार्न, मल्टी टोन हार्न, अतिरिक्त लाइट और मोडिफाइड वाहनों को सड़कों पर नहीं चलने देने, वाहनों में अतिरिक्त लाइट खास कर लाल और नीले रंग की लाइट, जो आपातकालीन वाहनों का आभास देती हैं, को तत्काल हटाने का निर्देश दिया है। सरकार ने बताया कि समय-समय पर होती है वाहनों की जांच सरकार की ओर से अदालत को बताया गया कि समय-समय पर वाहनों की जांच की जाती है और नियमों का पालन नहीं करने वालों के खिलाफ कार्रवाई की जाती है। इस संबंध में आदर्श सेवक समाज नामक संस्था ने जनहित याचिका दाखिल की है। 13वीं जेपीएससी नियुक्ति मामला दिव्यांग कोटे की पांच सीटों पर नियुक्ति नहीं करने का निर्देश 13वीं जेपीएससी नियुक्ति परीक्षा में दिव्यांग कोटे की सीट भरने के खिलाफ दाखिल याचिका पर झारखंड हाईकोर्ट के जस्टिस आनंद सेन की पीठ में गुरुवार को सुनवाई हुई। अदालत ने दिव्यांग कोटे की पांच सीटों पर नियुक्ति नहीं करने का निर्देश दिया है। राज्य सरकार और जेपीएससी को 10 सप्ताह में जवाब दाखिल करने को कहा गया है। अदालत ने प्रथम दृष्टया माना कि नियुक्ति में आरक्षण की अनदेखी हुई है। इस संबंध में राहुल वर्धन की ओर से हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की गई है। सुनवाई के दौरान प्रार्थी की ओर से अदालत को बताया गया कि जेपीएससी ने 342 पदों के लिए नियुक्ति प्रक्रिया शुरू की थी। सभी 342 पदों का परिणाम भी जारी कर दिया गया है। इसमें सिर्फ 8 दिव्यांगों की ही नियुक्ति की सिफारिश की गई है, जबकि नियमों के तहत दिव्यांगों के लिए 13 पद आरक्षित होने चाहिए।


