द्वारका पीठाधीश्वर जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी प्रज्ञानंदजी महाराज रविवार को शताब्दी एक्सप्रेस से मुरैना पहुंचे। सामाजिक सद्भाव सम्मेलन को संबोधित करते हुए राम राज्य की स्थापना पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि हिंदू राष्ट्र की मांग से ज्यादा आवश्यक राम राज्य की स्थापना है। स्वामी जी ने सनातन धर्म की शाश्वतता पर विश्वास जताते हुए कहा, कंस और रावण के समय से लेकर आज तक सनातन को कोई मिटा नहीं सका। जिन्होंने मिटाने का प्रयास किया, वे खुद खत्म हो गए। एक निजी स्कूलों में आयोजित कार्यक्रम में उन्होंने कहा कि सनातन धर्म की चिंता नहीं है, बल्कि सनातनी विचारधारा को जीवित रखने की आवश्यकता है। चंबल को उन्होंने संतो की भूमि करार देते हुए कहा कि इस क्षेत्र को नकारात्मक प्रचार से जोड़ना दुर्भाग्यपूर्ण है। अखंड भारत की परिकल्पना
एक सवाल के जवाब में स्वामी प्रज्ञानंदजी ने सनातन धर्म और अखंड भारत के प्रति अपनी दृष्टि साझा की। रामभद्राचार्य जी की पीओके को भारत में मिलाने वाली टिप्पणी पर उन्होंने कहा, ‘सिर्फ पीओके ही नहीं, हमें पूरे अखंड भारत को सनातन पृष्ठभूमि के साथ खड़ा करना होगा। समग्र विश्व के विकास, शांति और सद्भावना के लिए यह दृष्टिकोण आवश्यक है।’ मुस्लिम समुदाय के बयानों पर प्रतिक्रिया
प्रयागराज कुंभ की जमीन को वक्फ बोर्ड की बताने वाले बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए शंकराचार्य ने कहा, ‘जिनके इतिहास में हिंसा, लूटपाट और धर्म परिवर्तन रहा है, उनकी संतान ऐसे ही बयान देती हैं। इसे हल्के में लेना चाहिए। उन्हें ऐसे विषयों पर टिप्पणी करने का कोई अधिकार नहीं है।’ शंकराचार्य स्वामी प्रज्ञानंदजी ने अपने संबोधन में स्पष्ट किया कि सनातन धर्म एक शाश्वत और नित्य परंपरा है, जो समय के साथ और मजबूत होती रही है। उन्होंने चंबल की धरती को सनातन जागरण का केंद्र बनाकर इसे नकारात्मक छवि से बाहर लाने का आह्वान किया। देखिए तस्वीरें…


