न्यू पटेल नगर स्थित संतोष धर्मशाला में श्री बांके बिहारी कथा समिति हैबोवाल की ओर से चल रही श्रीमद् देवी भागवत कथा में रावण वध, श्रीराम-शबरी मिलन, अनुसूया-अत्रि ऋषि संवाद, सुग्रीव से मित्रता और रामराज्य स्थापना के प्रसंगों को भावुक कर देने वाले अंदाज में सुनाया गया। कथा व्यास आचार्य राजन कृष्ण महाराज ने विधिवत पूजन के बाद कथा का प्रवाह आगे बढ़ाया और श्रद्धालुओं को बताया कि कैसे राम ने शबरी के प्रेम से भाव-विभोर होकर उसके झूठे बेर खाए और उसे मोक्ष प्रदान किया। उन्होंने कहा कि बाल्यावस्था से वृद्धावस्था तक शबरी ने ऋषियों की सेवा की और एक दिन मतंग ऋषि ने उसकी निष्ठा देखकर उसे वरदान दिया कि उसे प्रभु श्रीराम के दर्शन अवश्य होंगे। शबरी हर दिन रास्ता झाड़कर प्रभु की प्रतीक्षा करती थी। जब श्रीराम पंपा सरोवर पहुंचे तो शबरी ने उन्हें प्रेमपूर्वक बेर अर्पण किए, जिनमें से वह खुद चखकर मीठे बेर चुनकर देती रही। राम ने उन्हें आदर से ग्रहण किया और प्रेम की पराकाष्ठा को दर्शाया। इतना ही नहीं लक्ष्मण को प्रेम का संदेश भी दिया। आचार्य राजन कृष्ण जी ने बताया कि रामचंद्र जी ने राक्षसों का संहार कर किष्किंधा पर्वत पर सुग्रीव से मित्रता की और धर्म की स्थापना की। उन्होंने अनुसूया के चरित्र का उल्लेख करते हुए बताया कि पतिव्रता अनुसूया ने ब्रह्मा, विष्णु, महेश को बालक बना दिया था और उनके तप से प्रसन्न होकर त्रिदेवों ने उन्हें वरदान दिया। रामराज्य की महिमा, राम-हनुमान संबंध और भक्तों पर कृपा के प्रसंगों ने श्रद्धालुओं को भावविभोर कर दिया। इस अवसर पर संकट मोचन हनुमान मंदिर से अमन जैन और ऋषि जैन विशेष रूप से कथा में पहुंचे और अगली हनुमान जयंती पर कथा आयोजन का निमंत्रण दिया। राम जी चले ना हनुमान के बिना जैसे भजनों से वातावरण भक्तिमय हो गया। अंत में प्रभु आरती कर कथा को विराम दिया गया।


