जिले में शराब की दुकानों पर पारदर्शिता लाने और उपभोक्ताओं को ‘ओवर रेटिंग’ से बचाने के लिए आबकारी विभाग द्वारा जारी किए गए आदेश फिलहाल कागजों तक ही सीमित नजर आ रहे हैं। प्रदेश के अतिरिक्त आबकारी आयुक्त ने स्पष्ट निर्देश दिए थे कि जिले की प्रत्येक शराब दुकान पर रेट लिस्ट चस्पा की जाए, लेकिन हकीकत इसके बिल्कुल उलट है। शहर से लेकर ग्रामीण इलाकों तक, अधिकतर दुकानों से रेट लिस्ट नदारद है। क्या था विभाग का आदेश विभाग ने बढ़ती शिकायतों को देखते हुए यह बड़ा फैसला लिया था कि हर दुकान के बाहर एक ऐसा रेट लिस्ट बोर्ड लगाया जाएगा, जिस पर हर ब्रांड का अधिकतम खुदरा मूल्य (MRP) साफ-साफ अंकित हो। यह बोर्ड ऐसे स्थान पर लगाया जाना अनिवार्य है जहां से ग्राहक उसे आसानी से देख सकें। इसका मुख्य उद्देश्य ग्राहकों को जागरूक करना और सेल्समैन द्वारा की जा रही अवैध वसूली पर लगाम लगाना था। वर्तमान में जिले की स्थिति यह है कि इक्का-दुक्का दुकानों को छोड़कर कहीं भी रेट लिस्ट नहीं लगी है। इसका सीधा फायदा दुकान संचालक उठा रहे हैं। सेल्समैन हर बोतल पर प्रिंट रेट से 10 से 50 रुपये तक अतिरिक्त वसूल रहे हैं। जब कोई जागरूक ग्राहक रेट लिस्ट मांगता है या एमआरपी पर शराब देने की बात करता है, तो सेल्समैन अक्सर अभद्र व्यवहार करते हैं। प्रशासनिक सुस्ती अतिरिक्त आबकारी आयुक्त के आदेशों को तुरंत प्रभाव से लागू करने की जिम्मेदारी जिला आबकारी अधिकारियों की थी। आदेश जारी हुए कई दिन बीत जाने के बाद भी दुकानों पर बोर्ड न होना विभाग की कार्यप्रणाली पर सवालिया निशान खड़े करता है। आबकारी अधिकारी रियाजुद्दीन उस्मानी ने बताया कि सभी दुकानों में रेट लिस्ट के आदेश किए है। जांच भी कर रहे। जिन्होंने नहीं लगाई उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई करेंगे। रेट लिस्ट लगने से हर ब्रांड की सही कीमत का पता चलेगा और ओवर रेट के मामलों में कमी आएगी।


