लखमा गिरफ्तार, बोले-मैं तो अनपढ़ अफसरों ने जहां बोला वहां साइन किए हकीकत- जब मंत्री थे, उनके आदेश पर ही बदली गई नीति प्रदेश के चर्चित 2161 करोड़ के आबकारी घोटाले में प्रवर्तन निदेशालय(ईडी) ने तत्कालीन आबकारी मंत्री कवासी लखमा को गिरफ्तार कर लिया। मामले में पहला मौका है, जब किसी नेता पर एजेंसी ने कार्रवाई की है। बुधवार को लखमा को एजेंसी ने तीसरी बार पूछताछ के लिए बुलाया था। लखमा बेटे हरीश के साथ पहुंचे थे। हालांकि कहने के बावजूद वे सीए को साथ नहीं ले गए। इसी दौरान ये कार्रवाई हुई। एजेंसी ने हरीश को गिरफ्तार नहीं किया है। कवासी को देर शाम विशेष ईडी अदालत में पेश किया। वहां उन्हें 21 जनवरी तक के लिए ईडी की रिमांड पर भेज दिया गया। अदालत परिसर में पूर्व मंत्री लखमा ने आरोप लगाया है कि राज्य में पंचायत चुनाव होने वाले हैं। बस्तर में कांग्रेस की स्थिति अच्छी है। इसलिए प्रधानमंत्री मोदी, गृहमंत्री शाह और सीएम साय ने गरीब आदिवासी पर कार्रवाई की है। मुझे कोई पैसा नहीं मिलता था। जिस मकान की बात ईडी कर रही है, वह मेरे बेटे हरीश का है। उससे मेरी बातचीत बंद है। वह अपने परिवार के साथ अलग रहता है। मेरे नाम से कोई संपत्ति नहीं है। मैं अनपढ़ हूं। मुझे जहां बोला गया, मैंने दस्तावेज में दस्तखत कर दिए। ईडी को जांच में कुछ नहीं मिला। ईडी के वकील डॉ. सौरभ पांडेय ने बताया कि आबकारी घोटाले में लखमा की अहम भूमिका के सबूत मिले हैं। पूर्व में इस मामले में गिरफ्तार कुछ आरोपियों और आबकारी अधिकारियों ने कबूल किया है कि कमीशन का पैसा पूर्व मंत्री को मिलता था। कमीशन की राशि 2 करोड़ रुपए महीने थी। आबकारी अधिकारी इकबाल अहमद ने स्वीकार किया है कि हर माह कमीशन के तौर पर 50 लाख रुपए पूर्व मंत्री को देते थे। जेल में बंद तत्कालीन आबकारी सचिव आईटीएस अधिकारी अरुणपति त्रिपाठी ने कहा है कि अनवर ढेबर के माध्यम से डेढ़ करोड़ रुपए हर माह तत्कालीन मंत्री को दिए जाते थे लखमा के तत्कालीन ओएसडी जयंत देवांगन ने भी कहा कि आबकारी सब इंस्पेक्टर कन्हैया कुर्रे के माध्यम से कमीशन का पैसा आता था, जो मंत्री तक पहुंचता था। इस तरह से लखमा को हर महीने 2 करोड़ रुपए मिलते थे। दस्तावेजों में भी लखमा के दस्तखत हैं। अनपढ़ का तर्क खारिज… ईडी ने जुटाए तथ्य और दबोच लिया बयानों से वार अनपढ़ बताकर बच नहीं पाएगा भ्रष्टाचारी
मामले में करीब 2 हजार करोड़ के घोटाले की आशंका है। इसमें जो भी दोषी होगा, उसपर ईडी कार्रवाई करेगी। अनपढ़ बोलकर भ्रष्टाचारी बच नहीं पाएगा। कांग्रेस कुछ भी बोले कुछ भी करे, कानून सबके लिए बराबर है।
-विष्णुदेव साय, मुख्यमंत्री लूट के सरगना भूपेश हैं, कवासी मोहरा
पूर्व सीएम भूपेश बघेल ने घोटालों को अंजाम देने के लिए लखमा को मोहरे के तौर इस्तेमाल किया। लखमा को जान-बूझकर आबकारी मंत्री बनाया था ताकि वह इस घोटाले को अंजाम दे सकें।
-केदार कश्यप,वन मंत्री सरकार के इशारे पर हो रही कार्रवाई
लखमा की गिरफ्तारी बदले की भावना से की गई कार्रवाई है। केंद्र सरकार में बैठे आकाओं के इशारे पर ईडी कांग्रेस नेताओं को बदनाम करने की साजिश रच रही है। पूरी कांग्रेस पार्टी कवासी के साथ खड़ी है।
-भूपेश बघेल, पूर्व सीएम 2020 में घोटाला उजागर, अब तक 7 गिरफ्तािरयां कमीशन में लखमा को मिले 72 करोड़: ईडी प्रमोद साहू – रायपुर
आबकारी घोटाले में फंसने के बाद पूर्व मंत्री कवासी लखमा लगातार बयान दे रहे हैं कि वे अनपढ़ हैं। ईडी ने लखमा की गिरफ्तारी का आधार आबकारी नीति में बदलाव को बनाया है, जिससे भ्रष्टाचार हुआ। ईडी का दावा है कि लखमा के मंत्री बनने के बाद ही आबकारी नीति-2017 में बदलाव किया गया। इससे उन्हें सीधा लाभ पहुंचा। उनके हस्ताक्षर से आबकारी में पूरा सिस्टम बदला और सिंडीकेट बन गया। ईडी की ओर से कोर्ट में पेश किए गए दस्तावेजों के मुताबिक- तत्कालीन आबकारी सचिव अरुणपति त्रिपाठी ही पूरा सिस्टम चला रहे थे। उन्होंने ही सिंडीकेट की अहम कड़ी इंडियन टेलिकॉम सर्विस के अधिकारी अरुणपति त्रिपाठी को पहले आबकारी सचिव बनाया, फिर उन्हें छत्तीसगढ़ स्टेट मार्केटिंग कार्पोरेशन (सीएसएमसीएल) का प्रबंध संचालक बना दिया। उनके बाद आईएएस निरंजन दास को आबकारी आयुक्त बनाया। दोनों ने अनवर ढेबर, तत्कालीन संयुक्त सचिव अनिल टुटेजा और रिटायर्ड आईएएस अफसर विवेक ढांढ के साथ मिलकर सिंडीकेट खड़ा किया। पहले सरकार सीधे फैक्ट्री या कंपनी से विदेशी शराब खरीदती थी। वेबरेज कॉर्पोरेशन से दुकानों में सप्लाई होती थी, लेकिन लखमा के दौर में एफएल-10 लाइसेंस सिस्टम को ही बदल दिया। सरकार एफएल-10ए का नया लाइसेंस लेकर आई। यह लाइसेंस कारोबारी अनवर ढेबर के तीन करीबियों की कंपनी नेक्सजेन पॉवर इंजीटेक, श्री ओम सांई बेवरेज प्रा.लि. और दिशिता वेंचर्स प्रा. लि. को दिया गया। लाइसेंस लेने के बाद ये कंपनियां शराब बनाने वाली कंपनियों से स्टॉक खरीदती थी। उसमें अपना 10% कमीशन जोड़कर सरकार को सप्लाई करती थीं। इससे सरकार को 2000 करोड़ का राजस्व नुकसान हुआ है। इसी कमीशन का सिंडीकेट को 60% जाता था। यही पैसा नेताओं से लेकर अधिकारियों को मिला। दावा:भ्रष्टाचार के पैसे का घर पूर्व सीएम के भी साइन : एजेंसी
ईडी का दावा है कि जिन दस्तावेजों में लखमा के साथ ही तत्कालीन मुख्यमंत्री के भी दस्तखत हैं। अब उनकी भूमिका की भी ईडी जांच कर रही है। पूर्व सीएम के भी साइन : एजेंसी
ईडी का दावा है कि जिन दस्तावेजों में लखमा के साथ ही तत्कालीन मुख्यमंत्री के भी दस्तखत हैं। अब उनकी भूमिका की भी ईडी जांच कर रही है।


