छत्तीसगढ़ शराब घोटाले में जेल में बंद आरोपियों की जमानत याचिका पर शुक्रवार को सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हुई। कोर्ट ने इस मामले में अरुणपति त्रिपाठी, दीपक दुआरी और अनुराग द्विवेदी को जमानत दे दी है। हालांकि, रिटायर्ड IAS अनिल टुटेजा और अनवर ढेबर की जमानत याचिका को खारिज कर दिया गया, जिससे उन्हें जेल में ही रहना होगा। इस मामले में आरोपियों की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ताओं ने पैरवी की। अनुराग द्विवेदी और दीपक दुआरी के लिए सीनियर एडवोकेट सिद्धार्थ अग्रवाल और शशांक मिश्रा, जबकि अरुणपति त्रिपाठी के लिए सीनियर एडवोकेट मीनाक्षी माथुर ने दलीलें पेश कीं। सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा सुप्रीम कोर्ट की जस्टिस एएस ओक की बेंच ने फैसला सुनाते हुए कहा कि मामले में दर्ज किए गए निष्कर्षों पर विचार करने के बाद अपीलकर्ताओं को जमानत दी जानी चाहिए। कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि इससे जांच किसी भी तरह प्रभावित नहीं होगी। कोर्ट के आदेश के अनुसार, आरोपियों को 10 अप्रैल 2025 को जमानत पर रिहा किया जाएगा, लेकिन उन्हें कुछ सख्त शर्तों का पालन करना होगा। आरोपियों को अपना पासपोर्ट जमा करना होगा और वे देश से बाहर नहीं जा सकेंगे। साथ ही, उन्हें हर सुबह 10 बजे जांच अधिकारी (IO) के सामने हाजिरी देनी होगी। अगर आरोप पत्र दायर किया जाता है, तो आरोपियों को जांच में पूरा सहयोग करना होगा। सत्र न्यायालय अन्य शर्तों के साथ जमानत पर रिहाई की प्रक्रिया पूरी करेगा। कौन है अरुण पति त्रिपाठी ? अरुणपति त्रिपाठी छत्तीसगढ़ सरकार के आबकारी विभाग के विशेष सचिव रह चुके हैं। इससे पहले वे छत्तीसगढ़ स्टेट मार्केटिंग कॉर्पोरेशन लिमिटेड (CSMCL) के एमडी भी रहे हैं। त्रिपाठी मूल रूप से इंडियन टेलीकॉम सर्विस के अधिकारी हैं और डेपुटेशन पर छत्तीसगढ़ में कार्यरत थे। शराब घोटाले में उनकी भूमिका को लेकर प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने 5 अक्टूबर 2024 को रायपुर की विशेष अदालत में उनके खिलाफ पूरक अभियोजन परिवाद दायर किया। कोर्ट ने उसी दिन इस मामले पर संज्ञान लिया था, लेकिन 7 फरवरी 2025 को हाईकोर्ट ने PMLA कोर्ट के संज्ञान को रद्द कर दिया। अरुणपति त्रिपाठी 8 अगस्त 2024 से न्यायिक अभिरक्षा में जेल में बंद हैं। क्या है छत्तीसगढ़ का शराब घोटाला छत्तीसगढ़ शराब घोटाला मामले में ED जांच कर रही है। ED ने ACB में FIR दर्ज कराई है। दर्ज FIR में 2 हजार करोड़ रुपए से ज्यादा के घोटाले की बात कही गई है। ED ने अपनी जांच में पाया कि तत्कालीन भूपेश सरकार के कार्यकाल में IAS अफसर अनिल टुटेजा, आबकारी विभाग के एमडी AP त्रिपाठी और कारोबारी अनवर ढेबर के सिंडिकेट के जरिए घोटाले को अंजाम दिया गया था। डुप्लीकेट होलोग्राम लगाकर बेची गई शराब ED की ओर से दर्ज कराई गई FIR की जांच ACB कर रही है। ACB से मिली जानकारी के अनुसार साल 2019 से 2022 तक सरकारी शराब दुकानों से अवैध शराब डुप्लीकेट होलोग्राम लगाकर बेची गई। इससे शासन को करोड़ों के राजस्व का नुकसान हुआ है। 2019 से 2022 के बीच चले शराब घोटाले में ED के मुताबिक ऐसे होती थी अवैध कमाई A: डिस्टलरी संचालकों से कमीशन B: नकली होलोग्राम वाली शराब को सरकारी दुकानों से बिकवाना C: डिस्टलरीज की सप्लाई एरिया को कम/ज्यादा कर अवैध धन उगाही करना ………………………………………………….. इससे जुड़ी ये खबर भी पढ़ें छत्तीसगढ़ शराब घोटाला…सिंडिकेट में विवेक ढांड का भी नाम:ED ने लिखा-रिटायर्ड IAS के संरक्षण में हो रहा था काम; हो सकती है गिरफ्तारी छत्तीसगढ़ शराब घोटाले मामले में अब नया और बड़ा नाम सामने आया है। ED के दस्तावेज के मुताबिक, घोटाले के सिंडिकेट में शामिल लोग रिटायर्ड IAS अधिकारी विवेक ढांड के संरक्षण में काम कर रहे थे। पूर्व आबकारी मंत्री कवासी लखमा की गिरफ्तारी के बाद कई खुलासे सामने आ रहे हैं। ED ने कोर्ट में अपने दस्तावेज पेश किए जिसमें बताया गया है कि इस शराब सिंडिकेट में बड़े अधिकारियों की भी भूमिका रही है। पढ़ें पूरी खबर…


