शहर से सटा राजकीय प्राथमिक विद्यालय बड़गांव असामाजिक तत्वों का ठिकाना बन गया है। स्कूल उदयपुर विकास प्राधिकरण (यूडीए) की जमीन पर बना है। लेकिन, अब अवैध कब्जों के चलते अब यह परिसर कबाड़खाने और नशे के अड्डे में तब्दील हो चुका है।
स्कूल परिसर में बसी कालबेलिया बस्ती के लोग स्कूल परिसर में नहाने, कपड़े सुखाने और शराब पीने जैसे कृत्य करते दिखाई देते रहते हैं। स्कूल परिसर में आपसी झगड़े, गालीग-लौज और असामाजिक गतिविधियां आम बात है। इन हालातों का सबसे बड़ा खामियाजा मासूम छात्र-छात्राओं को भुगतना पड़ रहा है। भय और असुरक्षा के माहौल के बीच कई अभिभावक बच्चों को स्कूल भेजने से ही कतराने लगे हैं। स्कूल परिसर में कबाड़ डंप किया जा रहा है और केबल वायर जलाने से उठने वाली जहरीला धुआं बच्चों के स्वास्थ्य पर विपरित प्रभाव डाल रहा है। स्थानीय जनप्रतिनिधियों और स्कूल स्टाफ ने यूडीए व जिला प्रशासन को कई बार लिखित शिकायतें दीं, लेकिन कार्रवाई तो दूर कोई अधिकारी स्कूल के इन हालातों को देखने तक नहीं पहुंचा। प्रशासन इतना लाचार क्यों? सांसद-सरपंच और क्षेत्रवासियों के साथ विद्यार्थी-अभिभावक भी लगा चुके गुहार
सांसद डॉ. मन्नालाल रावत, बड़गांव के निवर्तमान सरपंच व वर्तमान में प्रशासक संजय शर्मा, स्कूल प्रशासन कई बार जिला प्रशासन, पुलिस प्रशासन, यूडीए को लिखित में शिकायत कर चुके हैं कि इस स्कूल परिसर में अवैध बस्ती और नशाखोरी से विद्यार्थियों-अभिभावकों, गांववासियों में गहरा रोष है। शिक्षा के नाम पर बच्चों को ऐसे माहौल में भेजना मजबूरी बन गया है। आए दिन शराबियों का जमावड़ा, झगड़े और गंदगी बच्चों के मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य पर असर डाल रहे हैं। कई अभिभावकों ने साफ कहा कि यदि जल्द अतिक्रमण नहीं हटाया गया तो वे बच्चों के स्थानांतरण प्रमाण पत्र (टीसी) कटवाने को मजबूर होंगे। स्कूल स्टाफ का कहना है कि उन्होंने कई बार प्रशासन और यूडीए को पत्र लिखे, लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई। परिसर में कबाड़ जलाने से उठने वाला धुआं कक्षाओं तक पहुंचता है। पुलिस थाना, तहसील और उपखंड कार्यालय पास होने के बावजूद कार्रवाई न होना प्रशासनिक उदासीनता को उजागर करता है। अभिभावकों ने स्कूल परिसर को सुरक्षित घोषित कर तत्काल अतिक्रमण हटाने की मांग की है।


