272 भूखंड का फर्जीवाड़ा:हाईकोर्ट का सख्त रुख, एसपी को आदेश- 45 दिन में पेश करें रिपोर्ट, वरना कार्रवाई

प्रदेशभर में नगर निकाय चुनावों के अप्रैल 2026 में कराने की घोषणा के साथ ही नगर निगम उदयपुर के बहुचर्चित 272 प्लॉटों के घोटाले का मुद्दा फिर गरमा गया है। मामले की जांच में हो रही देरी पर अब हाईकोर्ट ने सख्त रुख अपनाया है। हाईकोर्ट ने उदयपुर पुलिस अधीक्षक को 45 दिन में जांच पूरी कर रिपोर्ट प्रस्तुत करने का अल्टीमेटम दिया है। देरी होने पर हाईकोर्ट जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई करेगा। प्रकरण के अनुसार चांदपोल निवासी नरेंद्र सिंह राजावत ने गृह विभाग के सचिव, उदयपुर रेंज आईजी, एसपी और हिरणमगरी सीआई के खिलाफ याचिका दायर की। इसमें बताया कि साल 2022 में हिरणमगरी थाने में रिपोर्ट दर्ज की गई थी। फिर पुलिस ने जांच पूरी नहीं होना बताया। उन्होंने निष्पक्ष और जल्द जांच करने के लिए साल 2023 में हाईकोर्ट में रिट दायर की। इस पर हाईकोर्ट ने मई 2023 में उन्हें शिकायत आईजी और जांच अधिकारी के समक्ष पेश करने को कहा। आईजी व जांच अधिकारी को शिकायत पर 15 दिन में निर्णय लेने के निर्देश दिए गए थे। कोर्ट के निर्देश पर उन्होंने पुलिस अधिकारियों को शिकायत पेश की, लेकिन किसी ने ध्यान ही नहीं दिया। जांच को बिना नतीजे के लटकाए रखा और कोर्ट के निर्देशों का जानबूझकर उल्लंघन किया गया। इस मामले में हाईकोर्ट ने उदयपुर एसपी को मामले को व्यक्तिगत रूप से देखने और संबंधित अधिकारी को निर्देश जारी करने को कहा। साथ ही आदेश मिलने के 45 दिनों में मामले की जांच पूरी करने के निर्देश दिए। ऐसा नहीं होने पर कोर्ट दोषी अधिकारियों के खिलाफ जबरन आज्ञा की पालना नहीं करने की कार्रवाई करेगा। विधानसभा तक गूंज… विधायक ने बताया 500 करोड़ का घोटाला इस मुद्दे को सबसे पहले कांग्रेस के सहवृत पार्षद अजय पोरवाल ने उठाया था। जांच के बाद 48 पट्टों को निगम ने निरस्त कर दिया। इस बीच, शहर के पूर्व विधायक गुलाबचंद कटारिया और वर्तमान विधायक ताराचंद जैन ने भी इस मुद्दे को विधानसभा में उठाया था। ताराचंद जैन ने इसे 500 करोड़ का घोटाला बताया था। इसके बाद यूडीएच मंत्री जाबर सिंह खर्रा ने जवाब देते हुए कहा था कि इस मामले में जो भी आरोपी होगा, उसे छोड़ा नहीं जाएगा। इसके बाद ही अप्रैल 2022 में जांच के लिए मामला एसओजी के पास आया। इसकी जांच अभी तक जारी है। एसओजी जांच धीमी… 5 आरोपियों को पकड़ा, फिर आगे नहीं बढ़ी इस प्लॉट घोटाले के मामले में एसओजी भी जांच कर रही है। लेकिन, इस जांच की गति काफी धमी है। अब तक पांच आरोपियों की गिरफ्तारी की जा चुकी है। साल 2024 में 7 से 13 नवंबर के बीच एसओजी ने गुजरात के पंचमहल के पूर्व वार्ड पंच राकेश सोलंकी व पुरोहितों की मादड़ी निवासी दीपक सिंह, गत 21 नवंबर को किशनलाल, गत 12 दिसंबर को राजेंद्र धाकड़ और 17 दिसंबर को गोरखपुर (उत्तरप्रदेश) हाल मल्लातलाई निवासी राजदीप वाल्मिकी को पकड़ा था। फिर 25 दिसंबर को दीपक सिंह को जांच के लिए फिर गिरफ्तार किया था। गड़बड़ी ऐसे… फर्जी मुहर लगा खुद के नाम दिखाया आवंटन 272 प्लॉटों के घोटाले में नगर निगम की ओर से 22 फरवरी 2022 में हिरणमगरी थाने में रिपोर्ट दर्ज कराई गई थी। इसमें बताया कि नगर विकास प्रन्यास (अभी यूडीए) ने साल 2012 में नगर निगम को कुछ कॉलोनियां हस्तांतरित की थीं। इनमें कई भूखंड खाली थे और अधिकांश कॉर्नर के थे। सार संभाल नहीं करने से लोगों ने इन पर कब्जे कर लिए। इनकी जांच के लिए समिति गठित की गई। इसमें सामने आया कि यूआईटी से मिली मूल पत्रावलियों में फर्जी आवंटन पत्र मिले थे। इनमें मूल राशि जमा नहीं थी, लेकिन राशि जमा कराने की फर्जी मोहर लगाकर निगम को पत्रावलियां हस्तांतरित की गई। एमान सिंह, गोपीलाल ने धोखाधड़ी कर हिरणमगरी सेक्टर-5 का, प्यारचंद मेनारिया ने सेक्टर-6, भरत कुमार भट्ट ने सेक्टर-3, लक्ष्मण सिंह भाटी और जयंती भाई चौहान ने सेक्टर-4 के प्लॉट हड़प लिए थे।

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