शव को 5 किमी तक खटिया पर ढोना पड़ा:सड़क-पुल न होने से ग्रामीण परेशान, बारिश में समस्या हो जाती है और भी विकराल

हजारीबाग के विष्णुगढ़ प्रखंड में बुनियादी सुविधाओं के अभाव का उदाहरण सामने आया है। गोविंदपुर पंचायत के अंतर्गत चितरामो से गिधिनियां, परसातरी और मोसरीतरी जैसे दूरस्थ गांवों में आज भी सड़क और पुल जैसी आवश्यक सुविधाएं नहीं हैं। गुरुवार को गिधिनियां गांव के 30 वर्षीय प्रवासी मजदूर शनिचर मरांडी का शव उनके पैतृक गांव लाया गया। शनिचर की मृत्यु 28 जुलाई को कर्नाटक के काकीनाड़ा में हुई थी। बारिश के कारण नाला उफान पर था और रास्ते की स्थिति अत्यंत खराब थी। एम्बुलेंस शव को गांव से लगभग पांच किलोमीटर पहले ही छोड़ गई। परिजनों और ग्रामीणों को मजबूरन खटिया और बांस के सहारे शव को कंधों पर उठाकर उफनते नाले को पार करना पड़ा। कीचड़ भरी पगडंडियों और तेज बारिश ने यात्रा को और अधिक कठिन बना दिया। स्थानीय निवासियों का आरोप है कि वे हर वर्ष जनप्रतिनिधियों से पुल और सड़क निर्माण की मांग करते हैं। लेकिन चुनाव के बाद कोई भी वापस नहीं आता। वर्षा ऋतु में ये गांव पूरी तरह से कट जाते हैं। लगभग 600 आदिवासी परिवार रहते हैं बीमार व्यक्तियों को अस्पताल पहुंचाना या बच्चों का स्कूल जाना असंभव हो जाता है। आदिवासी नेता रमेश हेंब्रम के अनुसार, इन क्षेत्रों में लगभग 600 आदिवासी परिवार रहते हैं। ये परिवार दशकों से विकास से वंचित हैं। उन्होंने प्रशासन से शीघ्र सड़क, बिजली, पानी और पुल की व्यवस्था करने की मांग की है। यह घटना दर्शाती है कि स्वतंत्रता के 75 वर्षों के बाद भी विकास की रोशनी कई गांवों तक नहीं पहुंची है। इधर, विष्णुगढ़ बीडीओ अखिलेश कुमार ने बताया कि मामला संज्ञान में आया है। चूंकि वन भूमि है तो सड़क बनाने में समस्या आ रही है। वन विभाग से समन्वय स्थापित करके प्रधानमंत्री ग्रामीण सड़क योजना से इस क्षेत्र में सड़क बनाने को लेकर संबंधित विभाग को पत्र भेज दिया गया है। पीड़ित के घर जाकर उसे सरकारी योजनाओं का लाभ भी दिया जा रहा है।

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