2025 तक का मास्टर प्लान 50-60 लाख की आबादी के हिसाब से था। इसमें 725 गांव शामिल करते हुए 2940 वर्ग किमी एरिया जेडीए रीजन में शामिल किया गया, जो सिंगापुर से 4 गुना है। लेकिन जिन कॉन्सेप्ट से मास्टर प्लान बनाया गया था, वो पूरी तरह से लागू नहीं हुआ। नए मास्टर प्लान से पहले सरकार को 2025 के मास्टर प्लान को एक्सपर्ट कमेटी से रिव्यू करवाना चाहिए। इस मास्टर प्लान में सैटेलाइट टाउन डवलपमेंट पर बिल्कुल काम नहीं हुआ। शहर का विकास हॉरिजेंटल की बजाय छितराया रहा, जगह-जगह अवैध कॉलोनियां बस गई। ड्रेनेज, ट्रैफिक मैनेजमेंट, सड़क नेटवर्क पर काम नहीं होने से दूर-दूराज इलाकों में कॉलोनियां बस गई लेकिन सुविधाएं नहीं पहुंची। इकोनॉमिक हब डवलमेंट की रूपरेखा बने नए प्लान की बजाय कैपिटल सिटी रीजनल प्लान बनाकर कमेटी बने। इसके मुखिया सीएम बनें। कमेटी में निगम, जेडीए, पीडब्ल्यूडी, बिजली-पानी विभाग के अफसर शामिल हों। विभागों में को-अॉर्डिनेशन ना होने से एक काम हो जाता है, दूसरा अधूरा रहता है। कैपिटल सिटी रीजनल प्लान में हॉरिजेंटल आैर कॉम्पेक्ट डवलपमेंट की प्लानिंग की जाए। इसमें हाइराइज आैर इकॉनोमिक हब बनाकर शहर को एक दायरे में विकास हो ताकि इन्फ्रास्ट्रक्चर डवलपमेंट पर ज्यादा खर्च होने से बचेगा। रोजमर्रा के लिए शहरवासियों को ज्यादा मूवमेंट करने की जरूरत नहीं होगी। इस प्लान में ड्रेनेज, ट्रैफिक मैनेजमेंट, कनेक्टिंग रोड नेटवर्क प्लानिंग के साथ मास ट्रांसपोर्ट परिवहन की सुविधाएं विकसित करना जरूरी है। 2025 के मास्टर प्लान का पहले रिव्यू हो एचएस संचेती, पूर्व मुख्य नगर नियोजक, निदेशक जेडीए नए विजन डवलपमेंट के लिए बजट जरूरी: नए विजन के डवलपमेंट के लिए एक अलग से इंप्लीमेंट बॉडी का गठन का मुख्य विभागों को इसमें शामिल किया जाए । अलग-अलग फेज में तय समय में विकास की रूपरेखा बने आैर इन्फ्रास्ट्रक्चर, नई टाउनशिप, रोड नेटवर्क, पेयजल लाइन, ड्रेनेज सिस्टम के लिए बजट का प्रावधान हो। 2050 की आबादी के हिसाब पेयजल आपूर्ति का स्थाई प्लान बने : अगले 25-30 साल के विजन प्लान में अलग-अलग हब डवलपमेंट के साथ सबसे जरूरी है करीब सवा करोड़ की आबादी के पेयजल आपूूर्ति के लिए स्थाई वाटर सोर्स का प्लान बने।


