लुधियाना| ससराली गांव में सुबह से ही लोग अलग-अलग गांवों से लंगर, पीने का पानी और त्रिपाल लेकर ट्रैक्टरों में पहुंचे। कुछ लोग सिर्फ बाइक पर फोटो खिंचवाने आए और बिना किसी मदद किए लौट गए, जिसमें कई नेता भी शामिल थे। भास्कर की टीम ने ग्राउंड जीरो से गांव के हर घर में जाकर हालचाल जाना, तो एक ही जवाब सामने आया कि ‘हमारी जमीनें अवैध खनन ने खा लीं, और प्रशासन की लापरवाही ने हमें तबाह कर दिया।’ ग्रामीणों का कहना है कि अगर एक सप्ताह पहले बांध पर तैयारी कर ली जाती, तो आज गांव की ये हालत न होती। मिलिट्री के जवान और ग्रामीण मिलकर रेत की बोरियों से नया बांध तैयार कर रहे हैं। वहीं महिलाएं और बच्चे तिरपाल से अपना सामान ढंकने में जुटे हैं। मगर गांववाले अपना सामान पैक करके तैयार बैठे हैं कि कब दरिया का पानी उनके घरों में घुस जाए। कई लोग तो अपने बच्चों और परिजनों को रिश्तेदारों के यहां भेज चुके हैं। पिछले 3 दिन से प्रशासन और आर्मी के साथ ग्रामीण अपने गांव बचाने में जुटे हैं। यहां की कश्मीर कौर ने बताया कि बारिश का पानी दीवारों से टपक रहा है। कोई सुध नहीं ले रहा। संत सतनाम सिंह नामधारी की ओर से गांव में 2 सितंबर से श्री अखंड पाठ साहिब की सेवा ट्रॉली में शुरू की गई है, जिसमें श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी की सवारी विराजमान है। लोग कह रहे कि अवैध रेत माफिया की वजह से जमीन खोखली हो चुकी है। ग्रामीण ज्ञान सिंह ने कहा कि 1988 में भी ऐसा हुआ था, पर इस बार अवैध माइनिंग से हाल ज्यादा खराब हो गया है। दोपहर के 12 बजे हैं। सतलुज दरिया अपने पूरे ऊफान पर है। इतना ऊफान आसपास के लोगों ने कई साल से नहीं देखा। दो घंटे के अंदर 4 पेड़ देखते ही देखते नदी में समा गए। सब की निगाहों में एक डर है। डर… नदी किनारे मत्तेवाड़ा गांव के पास ससराली कॉलोनी में बने घरों के डूब जाने का। तीन रातों से ग्रामीण जागकर पहरा दे रहे हैं। दो दिन तक बिजली और पानी ठप रही। तीसरे दिन रात के 10 बजे बिजली, पानी आने लगा। करीब 5500 की आबादी वाले 5 गांवों- ससराली कॉलोनी, ससराली गांव, मांगट, ख्वाजके, बूथगढ़, खासी खुर्द गांव अलर्ट पर हैं। इन गांवों के लिए ग्रामीणों के साथ मिलकर मिलट्री पत्थर और रेत की बोरी रख रही है, जिससे अगर पानी आ भी जाए तो उसको रोका जा सके। रात 11.30 बजे तक गुरुद्वारे से अनाउंसमेंट होने लगा कि सतलुज का पानी चढ़ने लगा है। सभी घरों की छतों पर चले जाएं। डीसी की अपील- कुछ दिनके लिए घर खाली कर दें रात में डीसी हिमांशु जैन ससराली कॉलोनी पहुंचे। वहीं गांव में एंबुलेंस, डॉक्टर, आर्मी, तहसीलदार समेत प्रशासनिक अमला तैनात है। एडीसी पायल गोयल ने बताया कि ‘पूरी तैयारी की गई है, सभी विभाग एक्टिव हैं। ग्रामीणों से अनुरोध किया गया है कि वे कुछ दिन के लिए सुरक्षित स्थान पर चले जाएं।’ सतलुज की धार से ससराली कॉलोनी के किनारे आंखों के सामने दिनभर नदी में पेड़ गिरते रहे। देर रात पानी चढ़ने लगा, आर्मी डॉक्टर समेत प्रशासन तैनात इस एरिया में अवैध माइनिंग होने से कटाव तेजी से हो रहा है


