नाटक का मंचन 10 अप्रैल को शाम 6:15 बजे गोस्सनर कॉलेज के ओपन एयर ऑडिटोरियम में होगा भगवान बिरसा मुंडा की 150वीं जयंती वर्ष में शहर के विभिन्न कॉलेज व विश्वविद्यालय के 40 छात्र मिलकर बिरसा को श्रद्धांजलि देने के लिए नाटक का मंचन करेंगे। 10 अप्रैल को शाम 6:15 बजे गोस्सनर कॉलेज के ओपन एयर ऑडिटोरियम में इसका मंचन होगा। शहर की जानी-मानी नाट्य संस्था एक्सपोजर और गोस्सनर कॉलेज के संयुक्त तत्वावधान में 30 दिवसीय नाट्य कार्यशाला आयोजित की गई है। अब इसका प्रशिक्षण सत्र पूरा हो चुका है। इस प्रस्तुति के लिए युवा कलाकार राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय से प्रशिक्षित संजय लाल के निर्देशन में एक माह से पूरी लगन और कड़ी मेहनत से तैयारी कर रहे हैं। संजय लाल ने बताया कि इस नाटक के द्वारा युवा कलाकारों को अभिनय की बारीकियों से परिचित कराते हुए रंगमंच के अन्य पहलुओं की भी जानकारी दी गई। बिरसा मुंडा की जीवनी पर आधारित इस नाटक को अधिक से अधिक देखें, इसके लिए किसी तरह का प्रवेश शुल्क नहीं रखा गया है। बिरसा की भूमिका में दिखेंगे रोनित सैमुएल, कहा-गर्व महसूस कर रहा रांची यूनिवर्सिटी में पॉलिटिकल साइंस से एमए कर रहे रोनित सैमुएल इस नाटक में भगवान बिरसा मुंडी की मुख्य भूमिका निभा रहे हैं। संत जेवियर्स कॉलेज से बीए करते समय ही वह एक्टिंग से जुड़े व देश में कई जगहों पर नाटक में विभिन्न भूमिका निभाईं। उन्होंने बताया कि देश के जनजातीय गौरव भगवान बिरसा का किरदार निभाना मेरे लिए सम्मान की बात है। खासकर तब, जब आप झारखंड की राजधानी में इसका मंचन कर रहे हों। नाटक की तैयारी के शुरुआती दिनों से ही मैंने इस भूमिका को निभाते हुए इस बात पर विशेष ध्यान दिया कि भगवान बिरसा का व्यक्तित्व देशभक्ति और अपनी मिट्टी के प्रति समर्पण का प्रतीक है, इसे अच्छे से निभाऊं। यह मेरे लिए बड़ी चुनौती और ज़िम्मेदारी है कि मैं इस महान विभूति को उनके योग्य ढंग से प्रस्तुत कर पाऊं। इसके साथ ही सुनील राय बिरसा के पिता की भूमिका में दिखेंगे। श्वेता भारती बिरसा की मां, ब्रिगेडियर रतन दीप तिग्गा, गया मुंडा की भूमिका में श्वेतांग सागर, लेफ्टिनेंट बने हैं सूरज कुमार, जगरा मुंडा की भूमिका में रोहित उरांव, महाजन बने हैं आयुष कुमार, मोहम्मद आरिब जमींदार, ज्योति सिंह चंपा, दीक्षा कुमारी सालो, पलक गिरि ब्रिगेडियर की प|ी बनी हैं। युवा कलाकारों को प्रतिष्ठित नाटकों में काम का अवसर मिलेगा एक्सपोजर की मीडिया प्रभारी सुनीता लाल ने बताया कि इसके पहले भी इस नाट्य संस्था ने ‘अभिज्ञान शाकुंतलम्’, ‘चरणदास चोर’, ‘झारखंड के वीर सपूत’, ‘अंधेर नगरी’, ‘टूटा आईना’ और ‘सैंया भए कोतवाल’ की प्रस्तुति देश के कई राज्यों में होने वाले राष्ट्रीय नाट्य महोत्सव में प्रस्तुत कर चुके हैं। जिन युवा कलाकारों ने इसमें काम किया है, आगे उन्हें प्रतिष्ठित नाटकों में काम करने का अवसर मिलेगा। इस बार हम भगवान बिरसा मुंडा की संघर्षपूर्ण जीवनी पर आधारित नाटक कर रहे हैं। जल, जंगल व जमीन के लिए उनके संघर्ष को रोचक ढंग से दिखाएंगे। युवा बिरसा के जीवन से प्रेरणा लें, इसलिए इस सब्जेक्ट को चुना गया है।


