भास्कर न्यूज | अमृतसर सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के तहत अमृतसर में आवारा कुत्तों के लिए तयशुदा फीडिंग पॉइंट बनाने की दिशा में नगर निगम ने कमर कस ली है। इसी कड़ी में मंगलवार को नगर निगम अमृतसर के एडिशनल कमिश्नर सुरिंदर सिंह की अध्यक्षता में एक अहम रिव्यू मीटिंग हुई। निगम आवारा कुत्तों से जुड़ी शिकायतों और जानकारी के लिए एक टोल-फ्री हेल्पलाइन नंबर जल्द जारी करेगा। इस नंबर को शहर भर में पोस्टर, बैनर और सोशल मीडिया के जरिए पब्लिसिटी दी जाएगी, ताकि लोग आसानी से संपर्क कर सकें। बैठक सुप्रीम कोर्ट में चल रहे सुओ मोटो रिट पिटीशन “इन रे : सिटी हाउंडेड बाय स्ट्रेस, बच्चे चुकाते हैं खामियाजा’ के आदेशों के संदर्भ में बुलाई गई थी। कोर्ट ने देशभर के शहरी निकायों को निर्देश दिए हैं कि वे अपने-अपने इलाकों में आवारा कुत्तों के लिए तयशुदा फीडिंग जोन या फीडिंग पॉइंट पहचानें। एडिशनल कमिश्नर ने सभी मेडिकल ऑफिसर्स और फील्ड अफसरों को निर्देश दिए कि वे अपने-अपने वार्डों में जाकर डिटेल इंस्पेक्शन करें और ऐसे स्थान चिन्हित करें, जो लोगों की आवाजाही से थोड़े दूर हों, साफ-सुथरे हों और रिहायशी इलाकों में किसी तरह की परेशानी न पैदा करें। उन्होंने साफ कहा कि वार्ड-वाइज फीडिंग पॉइंट की पहचान और फाइनल लिस्ट सात दिन के अंदर तैयार की जाए। इसके बाद बुधवार को अगली रिव्यू मीटिंग रखी जाएगी, जिसमें रिपोर्ट की समीक्षा की जाएगी। मीटिंग में मौजूद सीनियर मेडिकल ऑफिस-कम- नोडल ऑफिसर, कैटल पाउंड डॉ. गीतू सरीन को निर्देश दिए गए कि वे सभी वार्डों से मिलने वाली जानकारी को इकट्ठा कर एक कंसॉलीडेटेड रिपोर्ट तैयार करें और निगम प्रशासन को सौंपें। फीडिंग प्वाइंट बनने के बाद सड़कों पर कुत्तों के झुंड नहीं दिखेंगे। इससे डॉग बाइट की घटनाएं कमी होंगी। फीडिंग पॉइंट या फीडिंग जोन वे तयशुदा जगहें होती हैं, जहां आवारा कुत्तों को खाना खिलाने की अनुमति होती है। इन जगहों को इस तरह चुना जाता है कि यह स्कूल, अस्पताल, बाजार और ज्यादा भीड़-भाड़ वाले इलाकों से दूर हों। लोगों और कुत्तों, दोनों की सेफ्टी का ध्यान रखा जा सके। इनका मकसद यह होता है कि कुत्ते इधर-उधर घूमकर खाने की तलाश में लोगों को परेशान न करें, सड़क पर झुंड न बनाएं और किसी तरह का खतरा पैदा न हो।


