भास्कर न्यूज | अमृतसर सुप्रीम कोर्ट से आदेश के बाद स्ट्रे डॉग्स को मैनेज करने की तैयारी तो निगम से शुरू कर दी है मगर 18 दिन बाद भी हेल्थ अफसर 5 फीडिंग प्वाइंट्स तैयार नहीं कर पाए हैं। वहीं, डॉग लवर्स का कहना है कि निगम का यह प्लान फेल हो जाएगा। शेल्टर होम ही कारगर है चूंकि यहां बीमार डॉग्स की देखभाल, खाने-पीने का उचित इंतजाम व अन्य जरूरी सुविधाएं उपलब्ध होती है। जैसा कि लुधियाना में तैयार कराया गया है। दरअसल, पशुपाल विभाग ने शहर में अनुमानित 40 हजार डॉग्स का डेटा निगम को सौंपा है। ऐसे में निगम की तरफ से 5 फीडिंग प्वाइंट्स का जो प्लान बनाया गया वह कारगर साबित न होना लािजमी है। इसके लिए वार्डवाइज डॉग्स की संख्या का डेटा जुटाना जरूरी है। चूंकि एक प्वाइंट्स में 20 से 40 डॉग्स ही मैनेज हो पाएंगे। चूंकि डॉग्स नहीं चाहते कि उनके इलाके में दूसरे डॉग्स एंट्री करें। एक बार फीडिंग प्वाइंट में जिन डॉग्स को खाना-पीना मिलने लगेगा वह उसे अपना घर-परिवार समझने लगते हैं। दूसरे इलाके के डॉग्स एंट्री करेंगे तो आक्रामक हो जाएंगे और इससे काफी मुश्किलें बढ़ेंगी। ऐसे में निगम को चाहिए कि डॉग्स को भोजन देने वालों से उनके इलाकों का डेटा तैयार करें। इसके बाद उस हिसाब से उस वार्ड में फीडिंग प्वाइंट बनाएं लेकिन यह इतना आसान नहीं होगा। चूंकि 20 डॉग्स मैनेज किया जाए तो 2 हजार और 40 करने पर 1000 फीडिंग प्वाइंट बनाने होंगे। चूंकि ज्यादा डॉग्स एकसाथ एक ही जगह पर रखने से भी मुश्किलें बढ़ेंगी। इसके बाद भोजन-पानी का प्रबंध करने के लिए निगम को मुलाजिम रखने पड़ेंगे। समाजसेविका मीनल अरोड़ा निवासी अजनाला रोड का कहना है कि फीडिंग प्वाइंट की जगह लुधियाना की तर्ज पर शेल्टर होम निगम बनवाए तो कारगर होगा। डॉग्स बाइट की वजह उनका भूखा-प्यारा रहना होता है। 15 साल से डॉग्स को मैनेज कर रही हैं। उनके पास 15 डॉग्स हैं। जबकि अलग-अलग इलाकों में भोजन देने जाती हैं। कई समाजसेवी संस्थाएं इस काम में बेहतर योगदान दे रही हैं। 40 हजार डॉग्स को मैनेज करने के लिए 5 प्वाइंट्स बनाया जाना तो समझ से परे हैं। दूसरे डॉग्स को अपने एरिया में आने नहीं देंगे। यदि डॉग्स के साथ कोई अनहोनी हुई है, एक्सीडेंट, मारपीट, भूखे हैं, तो ही वह काटते हैं। इसलिए हर किसी को अपने घरों के बाहर भोजन देना चाहिए। शेल्टर होम इसलिए कारगर है।


