शहर वनों की उपेक्षा:50 एकड़ के एकांत पार्क के लिए सिर्फ 24 लाख का बजट, वह भी वेतन में जा रहा, स्वर्ण जयंती और एम्स वन भी बदहाल

पॉश इलाके चार इमली से लगा 50 एकड़ में फैला एकांत पार्क, जो कभी हिल स्टेशन जैसी सुकूनभरी अनुभूति कराता था, अब उपेक्षा और गंदगी का शिकार हो गया है। राजधानी परियोजना के तहत 1996 में बने इस पार्क को पर्यावरण वानिकी वन मंडल संचालित कर रहा है। यहां रोज अफसरों समेत करीब 500 लोग व्यायाम और ध्यान के लिए आते हैं, लेकिन आसपास बहने वाले गंदे नाले और प्रदूषण से यहां माहौल खराब हो रहा है। पार्क के रखरखाव के लिए 24 लाख रुपए का वार्षिक बजट निर्धारित किया गया है, लेकिन इससे सिर्फ कर्मचारियों का वेतन की दिया जा पा रहा है। बजट की कमी के कारण स्थिति बिगड़ती जा रही है। इसके अलावा कोलार स्थित स्वर्ण जयंती पार्क और 22 एकड़ में फैला एम्स नगर वन भी उपेक्षा के कारण गंभीर स्थिति में है। एकांत पार्क : नाले के कारण टहलना हुआ मुहाल एकांत पार्क की बाउंड्री वॉल 10 वर्षों से क्षतिग्रस्त है, जिससे असामाजिक तत्वों का जमावड़ा बढ़ गया। स्थानीय नागरिकों का कहना है कि शराबियों और जुआरियों के कारण यहां सुबह की सैर और योग करना मुश्किल हो गया है। आवारा कुत्तों की समस्या ने भी माहौल को दूषित कर दिया है। स्थानीय निवासी विजय खंडेलवाल ने चिंता जताते हुए कहा कि सफाई और सुरक्षा की व्यवस्था में सुधार की जरूरत है।

गंदगी से सुंदरता बिगड़ी
पार्क में से बहने वाले नालों में आसपास के क्षेत्रों का गंदा पानी बहता है, जिससे दुर्गंध और वायु प्रदूषण फैल रहा है। पाइपलाइन की योजना अधूरी पड़ी है और नगर निगम की अनदेखी ने समस्या को और जटिल बना दिया है। पार्क में नाले के पास सफाई की कोई व्यवस्था नहीं है, जिससे यहां की सुंदरता को गंभीर नुकसान हो रहा है। प्रशासनिक तालमेल की कमी: वन विभाग के अधिकारियों के अनुसार, पार्क की सफाई और रखरखाव के लिए 24 लाख रुपए का वार्षिक बजट पर्याप्त नहीं है। वन क्षेत्रपाल सुमन सिंह ने बताया कि अधिकांश बजट श्रमिकों के वेतन में खर्च हो जाता है, जबकि इतने बड़े क्षेत्र की सफाई के लिए पर्याप्त मैनपावर और संसाधन उपलब्ध नहीं हैं। अधिकारियों का रुख: पर्यावरण वानिकी वन मंडल के डीएफओ लोकप्रिय भारती ने कहा कि यदि नाले की सफाई हमारे प्रोजेक्ट का हिस्सा है, तो इसे प्राथमिकता दी जाएगी। अन्यथा, इसके लिए अलग से बजट का प्रावधान किया जाएगा और नगर निगम के साथ चर्चा कर समस्या का समाधान किया जाएगा। स्वर्ण जयंती पार्क: चोरों का आतंक कोलार स्थित स्वर्ण जयंती पार्क भी अव्यवस्था का शिकार हो रहा है। पार्क की एक ओर बाबा नगर और दूसरी ओर दामखेड़ा झुग्गी बस्ती है। इन बस्तियों में रहने वाले असामाजिक तत्व पार्क की रेलिंग काटकर चोरी कर लेते हैं। यहां 500 से भी ज्यादा चंदन के पेड़ हैं, जिन्हें हर साल चोर काटकर ले जाते हैं। पुलिस को इसकी सूचना दी जाती है, लेकिन अब तक कोई भी चंदन के पेड़ चोरी करने वाला पकड़ा नहीं जा सका है। एम्स नगर वन: फेंसिंग की चोरी 22 एकड़ से ज्यादा क्षेत्र में बने एम्स नगर वन को 2014 में पौधरोपण के लिए विकसित किया गया था और 2020 में इसे नगर वन के तौर पर विकसित करना शुरू किया गया था। यहां वाकिंग ट्रैक और बैठने की व्यवस्था की गई है, लेकिन सुरक्षा के लिए बनाए गए लोहे के फेंसिंग को चोर लगातार काट रहे हैं। मेंटनेंस के लिए सालाना 4 लाख रुपए का बजट नाकाफी है। ​​​​​​​ चंदनपुरा नगर वन: लोकार्पण के बाद भी है बंद 125 एकड़ में बने चंदनपुरा नगर वन का लोकार्पण एक साल पहले किया गया था, लेकिन अब तक इसे जनता के लिए नहीं खोला गया है। इसका कारण यहां बाघों की मूवमेंट बताया जा रहा है। हाल के दिनों में दो बाघों को इस नगर वन के अंदर देखा गया। नगर वन खोलने से पहले लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए यहां अतिरिक्त जाली लगाई जा रही है। काम अंतिम चरण में है, और दावा किया जा रहा है कि नए साल में यह नगर वन जनता के लिए खोल दिया जाएगा। ​​​​​​​ समाधान – जिम्मेदारों को चाहिए वे बजट मांगें, मेंटेनेंस कराएं ​​​​​​​ ^नगर वन हो या पार्क इनको लगातार देखभाल की जरूरत होती है। ऐसे में मेंटेनेंस का सेपरेट बजट होना चाहिए। जिम्मेदारों को चाहिए कि वे बजट मांगे और मेंटेनेंस कराएं। नगर वन और पार्क में एक्टिविटी करें, इनमें वरिष्ठ अधिकारियों को बुलाएं। उन्हें साइट विजिट कराकर अपनी समस्याएं और बजट की जरूरत से अवगत कराएं। मेंटेनेंस नहीं होने पर न सिर्फ सुविधाओं में गिरावट आती है, बल्कि पेड़-पौधों की सेहत पर भी विपरीत असर पड़ता है।
– सुदेश बाघमारे, पूर्व डिप्टी डायरेक्टर, वन विहार भोपाल

FacebookMastodonEmail

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *