धनुर्धर शीतल देवी को तो आप सभी जानते ही होंगे। पेरिस पैरालिंपिक में पैर से तीर चलाते हुए देखा भी होगा। जम्मू-कश्मीर की इस तीरंदाज ने पैरालिंपिक के टीम इवेंट में ब्रॉन्ज मेडल जीता था। अब एक ऐसी तीरंदाज सामने आई है जिसके न दोनों पैर हैं और न ही दोनों हाथ। ये युवा धनुर्धर मुंह से तीर चलाती हैं इनका नाम है पायल नाग। पायल ने जयपुर में चल रही नेशनल तीरंदाजी में शीतल को हराकर चैंपियनशिप जीत ली। करंट लगने से काटने पड़े थे हाथ-पैर पायल रायपुर, ओडिशा से हैं। कहती हैं, मैं तीसरी क्लास में थी तब मुझे करंट लगा था। मुझे अस्पताल ले जाया गया। मेरे दोनों हाथ और दोनों पैर काटने पड़े। बाद में मुझे आश्रम में छोड़ दिया था। पायल मुंह से लिखती है शीतल पैर से तीर ही नहीं चलाती परीक्षा में पैर से ही लिखती है। पायल मुंह से तीर चलाती है तो लिखती भी मुंह से ही है। पायल ने तीरंदाजी का राउंड पूरा करने के बाद मुंह से ही स्कोर शीट पर साइन किए। जैसे परफेक्ट उनके निशाने थे उसी तरह परफेक्ट नाम उन्होंने शीट पर लिखा। मालूम हो कि पायल के पंजों के बिना नकली पैर लगाए जाते हैं। इनसे पायल धनुष पकड़ती हैं। उनकी बहन पैर ऊपर करती है और धनुष में लगा तीर पायल के मुंह में रखती हैं। पायल के मैक्सिमम तीर परफेक्ट-10 पर लगते हैं। शीतल को ही पीछे छोड़ दिया पायल ने जयपुर में नेशनल पैरा आर्चरी में शीतल और पायल दोनों ही आई हैं। खास बात यह है कि पायल ने कंपाउंड रैंकिंग राउंड में पैरालिंपिक ब्रॉन्ज मेडलिस्ट शीतल को पीछे छोड़ दिया। पायल (684/720) पहले और शीतल (674/720) दूसरे स्थान पर रही। शीतल के कोच कुलदीप ने ही सिखाई आर्चरी शीतल के कोच कुलदीप ने ही पायल (प्यार से उसे गोरी बोलते हैं) को आर्चरी सिखाई। कुलदीप कहते हैं, ‘मेरी स्टूडेंट शीतल पैरालिंपिक में मेडल जीत चुकी है। मैं एक ऐसे बच्चे की तलाश में था जिसके लिए मैं कुछ अलग कर सकूं। एक दिन सोशल मीडिया पर मैंने पायल की तस्वीर देखी। मैंने उस आश्रम से पायल को अपने साथ भेजने को कहा। वहां की हेड संस्कृति ने कहा, बिना कलेक्टर की परमिशन के आप इस बच्ची को अपने साथ नहीं ले जा सकते। कलेक्टर से परमिशन ली और पायल को अपने साथ वैष्णो देवी श्राइन बोर्ड में चल रही आर्चरी एकेडमी ले आए। और यहां शुरू हुई पायल की आर्चरी क्लास।’


