धर्म यात्रा महासंघ के प्रांतीय मंत्री एवं प्रवासी भलाई बोर्ड के पूर्व वाइस चेयरमैन राम गोस्वामी ने भारत में पश्चिमी सभ्यताओं के प्रचलन तथा भारतीय संस्कृति के मान मर्दन पर चिंता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि अगर हम सभी भारतीय संस्कृति को उत्कृष्टता प्रदान करना चाहते हैं तो विचार एवं कृति अच्छी होने के लिए संस्कारों की आवश्यकता है। भारतीय शास्त्र के अनुसार प्रत्येक कृति ही संस्कारयुक्त होनी चाहिए। संस्कार अर्थात सदगुणों को गुणा करना अर्थात बढ़ाना एवं दोषों का भागफल अर्थात दोषों को घटाना ही संस्कार है। अच्छी आदतें लगाना एवं बुरी आदतें निकाल कर फेंकना ही संस्कार है। बच्चों पर अच्छे संस्कार डालना अर्थात उन्हें माता-पिता जी वरिष्ठ जनों को प्रतिदिन प्रणाम करने के लिए प्रेरित करना, दूसरों की निंदा न करने के लिए नियमित ध्यान देना होगा, परंतु वह भी कैसे सिखाना चाहिए, यह भी संस्कार है। शिक्षा और संस्कार एक दूसरे से जुड़े हुए हैं। शिक्षा मनुष्य के जीवन का अनमोल उपहार है जो व्यक्ति के जीवन की दिशा और दशा दोनों बदल देती है और संस्कार जीवन का सार है जिसके माध्यम से मनुष्य के व्यक्तित्व का निर्माण और विकास होता है।


