नवंबर 2022 में चैटजीपीटी के लॉन्च के बाद से ही यह टूल सुर्खियों में बना हुआ है। इसे स्टूडेंट्स से लेकर जॉब के लगभग हर सेक्टर में उपयोग में लिया जा रहा है। इसके अलावा अब यह स्कॉलर्स का भी पसंदीदा विषय बन गया है। हाल ही चीन की हांगझू नॉर्मल यूनिवर्सिटी ने स्टूडेंट की लर्निंग पर होने वाले चैटजीपीटी के प्रभाव पर अध्ययन किया है। इसमें 84% छात्र यूनिवर्सिटीज के थे। यह रिसर्च हाल ही साइंस डायरेक्ट प्लेटफॉर्म पर प्रकाशित की गई है। इसे यूनिवर्सिटी के एसोसिएट प्रोफेसर रूकी डेंग ने लीड किया है। अध्ययन के मुताबिक 2022 से लेकर अब तक दुनिया की टॉप यूनिवर्सिटीज ने चैटजीपीटी पर 69 आर्टिकल्स प्रकाशित किए हैं। इनमें कॉन्फ्रेंस पेपर्स भी शामिल हैं। 2023 में 12 और 2024 में 57 आर्टिकल्स प्रकाशित हुए हैं। खास बात यह है कि सबसे ज्यादा एशिया में 49 रिसर्च चैटजीपीटी पर की गई है। 12 आर्टिकल्स के साथ यूरोप दूसरे स्थान पर है। इस रिसर्च के मुताबिक चैटजीपीटी से स्टूडेंट्स का एकेडमिक परफॉर्मेंस बेहतर हुआ है और इससे छात्रों में मोटिवेशन भी बढ़ा है। स्टूडेंट्स ने नए आइडियाज, किसी टॉपिक को समझने और राइटिंग पर फीडबैक लेने के लिए चैटजीपीटी का इस्तेमाल किया। छात्रों का आत्मविश्वास कई गुना बढ़ा
टूल से आर्ट्स और ह्यूमैनिटीज के छात्रों का एकेडमिक परफॉर्मेंस ज्यादा बेहतर हुआ। दूसरे स्थान पर साइंस और हैल्थ एंड मेडिकल के छात्र हैं। बाकी विषयों के छात्रों की परफॉर्मेंस पर ज्यादा असर नहीं देखा गया। दूसरी ओर, टूल से छात्रों में आत्मविश्वास बढ़ा है। वे अब कोई भी टास्क पूरा करने को लेकर कॉन्फिडेंट रहते हैं। इससे स्टडूेंट्स में क्रिटिकल और कम्प्यूटेशनल थिंकिंग भी बढ़ी है। वहीं नकारात्मक पक्ष भी आया कि समस्या को सुलझाने का मानसिक प्रयास नहीं करते हैं। लैंग्वेज एजुकेशन में बेहतर परफॉर्म करता है
वहीं ट्रेडिशनल क्लासरूम सेटिंग्स में चैटजीपीटी का सकारात्मक प्रभाव देखा गया। वहीं जिन छात्रों ने 5 से 10 हफ्तों तक चैटजीपीटी इस्तेमाल किया है उन पर इसका सकारात्मक असर देखा गया। इसके अलावा स्कूल के मुकाबले यूनिवर्सिटी के छात्रों की परफॉर्मेंस पर इस टूल का सकारात्मक असर देखा गया। इसी में शामिल कई रिसर्च में यह सामने आया है कि लैंग्वेज एजुकेशन में चैटजीपीटी बेहतर परफॉर्म करता है क्योंकि यह आसानी से आइडियाज दे सकता है और साइंटिफिकट राइटिंग को भी बेहतर करता है।


