शिक्षा, व्यवसाय, राजनीति और कला में महिलाओं की अहम उपस्थिति:जयपुर इंटेलेक्चुअल ग्रुप के सदस्यों ने की चर्चा, बोले- समान अवसर हमेशा मिलने चाहिए

जयपुर इंटेलेक्चुअल ग्रुप (JIG) की ओर से मासिक बैठक का आयोजन किया गया। इसमें भारतीय नारी: कल, आज और कल विषय पर एक विचारशील चर्चा का आयोजन किया गया। कार्यक्रम की मेजबानी सुमन शर्मा ने की। इसमें समूह के सदस्यों ने भारतीय नारी के अतीत, वर्तमान और भविष्य पर अपने विचार साझा किए। बैठक में भूतकाल पर चर्चा करते हुए बताया गया कि प्राचीन समय में भारतीय महिलाएं घर की चार दीवारों के भीतर सीमित थीं। उनकी स्वतंत्रता और अधिकारों पर कई सामाजिक बंधन थे, जो उनकी प्रगति में बाधा बने। उस दौर में महिलाओं की भूमिका घर तक सीमित थी। वे पुरुषों पर निर्भर रहती थीं। वर्तमान: शिक्षा और स्वावलंबन की ओर कदम आज की स्थिति पर चर्चा करते हुए सदस्यों ने कहा- वर्तमान में भारतीय महिलाएं शिक्षा, व्यवसाय, राजनीति और कला जैसे विभिन्न क्षेत्रों में अपनी उपस्थिति दर्ज करा रही हैं। उनकी स्थिति पहले की तुलना में काफी मजबूत हुई हैं। समाज के कई हिस्सों में महिलाओं ने नेतृत्व की भूमिका निभाई है, जो उनके सशक्तिकरण का प्रतीक है। भविष्य की चर्चा करते हुए यह कहा गया कि आने वाले समय में भारतीय महिलाएं और भी प्रगति करेंगी। वे सामाजिक और व्यवसायिक बंधनों को तोड़ते हुए अपने अधिकारों का विस्तार करेंगी। सदस्यों ने इस बात पर जोर दिया कि महिलाओं को समान अवसर प्रदान करना और उनकी क्षमताओं को पहचानना समाज के विकास के लिए आवश्यक है। सदस्यों ने माना कि महिलाओं की प्रगति के लिए समाज की मानसिकता में बदलाव जरूरी है। जब तक महिलाओं को समान अवसर और अधिकार नहीं मिलेंगे, तब तक वास्तविक सशक्तिकरण संभव नहीं होगा। सदस्यों ने इस बात पर भी जोर दिया कि समाज में समानता और सशक्तिकरण को बढ़ावा देने के लिए एक सामूहिक प्रयास की जरूरत है। इस कार्यक्रम में जेआईजी के कई सदस्य उपस्थित रहे, जिनमें अलका बत्रा, सुधीर माथुर, अशोक राही, सरिता सिंह, शशि माथुर, सपना महेश, राजुला लूना, विनोद भारद्वाज, विद्या जैन, टीना साहनी, अंशु हर्ष, सुधीर कासलीवाल, निर्मला सेवानी, और रानू श्रीवास्तव शामिल थे। सभी ने अपने-अपने विचार साझा कर इस विषय को और समृद्ध बनाया। मेजबान सुमन शर्मा ने कार्यक्रम को शानदार तरीके से संचालित किया और सभी प्रतिभागियों का धन्यवाद किया। उन्होंने कहा कि इस तरह की चर्चाएं न केवल समाज को नई दिशा देती हैं, बल्कि महिलाओं के सशक्तिकरण के लिए भी प्रेरणा का काम करती हैं।

FacebookMastodonEmail

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *