दिवंगत शिबू सोरेन का नाम झारखंड में पूरे सम्मान के साथ लिया जाता है। शिबू सोरेन झारखंड ही नहीं बल्कि पूरे देश में अपने आंदोलन आैर संघर्ष के लिए जाने जाते हैं। यूं तो शिबू सोरेन अपने परिवार में पहले ऐसे शख्सियत रहे, जिन्होंने राजनीति में कदम रखा। लेकिन, बाद में उनका पूरा परिवार ही राजनीति के क्षेत्र में आ गया। अब सोरेन परिवार राज्य का राजनीतिक दृष्टिकोण से सबसे बड़ा राजनीतिक घराना है। शिबू सोरेन तीन बार राज्य के मुख्यमंत्री रहने के अलावा केंद्रीय मंत्री भी रहे। जीवन के अंतिम क्षण तक वे राज्यसभा के सदस्य रहे। उनके पुत्र हेमंत सोरेन वर्तमान समय में राज्य के मुख्यमंत्री हैं। हेमंत सोरेन भी तीसरी बार मुख्यमंत्री बनें हैं। हालांकि, पहली बार मुख्यमंत्री बनने के पहले वे भाजपा नेता अर्जुन मुंडा की सरकार में डिप्टी सीएम का भी पद संभाल चुके हैं। इसी घराने में शिबू सोरेन के बड़े पुत्र रहे स्व. दुर्गा सोरेन अपने समय में दुमका जिले के जामा विधानसभा क्षेत्र से दो बार विधायक रहे। वर्ष 2009 में उनका आकस्मिक निधन हो गया। इसके बाद में इनकी धर्मप|ी सीता सोरेन जामा विधानसभा सीट से उनकी विरासत को आगे बढ़ाते हुए तीन बार विधायक चुनीं गईं। सीता सोरेन ने लगातार वर्ष 2009, 2014 और 2019 में जामा से चुनाव जीत कर विधायक रहीं। वर्ष 2024 में वह झामुमो छोड़ कर भाजपा में चली गई हैं। शिबू सोरेन के छोटे पुत्र बसंत सोरेन भी दुमका से विधायक हैं। हेमंत सोरेन सरकार के बाद आई चंपाई सोरेन की सरकार में बसंत सोरेन मंत्री भी बने थे। हालांकि जब दोबारा हेमंत सोरेन पिछली बार राज्य के मुख्यमंत्री बन, तब बसंत सोरेन मंत्रिमंडल में शामिल नहीं थे। इसके अलावा हेमंत सोरेन की पत्नी कल्पना सोरेन भी राजनीति के क्षेत्र में हैं। पहले उन्होंने गांडेय में उपचुनाव लड़ा और विजयी होकर विधायक बनीं। इसके बाद 2024 के झारखंड विधानसभा चुनाव में दोबारा गांडेय विधानसभा क्षेत्र से चुनाव लड़कर विजयी हुईं। वह फिलहाल विधायक हैं और विधानसभा की एक समिति की सभापति भी हैं। इस तरह से देखा जाए तो सोरेन परिवार झारखंड में सबसे बड़ा राजनीतिक परिवार तो है ही, सबसे मजबूत परिवार भी है। जबकि शिबू सोरेन की पुत्री अंजनी सोरेन की शादी ओडिशा में हुई है। वह भी ओडिशा में झामुमो से जुड़ी हुई हैं और दो बार चुनाव लड़ चुकी हैं। हालांकि वह चुनाव जीत नहीं सकी हैं। शिबू सोरेन ने शुरुआती दौर में जो आंदोलन किया उसमें उनकी पत्नी रूपी सोरेन का पूरा साथ मिला। शिबू सोरेन के संघर्ष और आंदोलन की तेज आंच में उन्होंने साथ देकर अपने पूरे परिवार को भी सुरक्षित रखा। परिवार के साथ दिशोम गुरु राजनीति में कदम रखने वाले परिवार के पहले शख्सियत थे गुरुजी, बाद में पूरा परिवार ही इस क्षेत्र से जुड़ता चला गया


