मैं खड़ा हूं रांची एयरपोर्ट के बाहर… यहां जमा हजारों लोगों के चेहरे पर किसी शख्स के आने की खुशी नहीं दिख रही है। सभी की आंखें नम हैं, चेहरे पर उदासी है। क्योंकि, आज हम सभी के चहेते नेता दिशोम गुरु की विदाई हो रही है। विदाई उस शख्स की, जिन्हें झारखंड की जनता ने गुरुजी के नाम से दिल में बसाया है। संताली में दिशोम गुरु का मतलब देश का पिता होता है, पिता इसलिए कि झारखंडियों के हक-अधिकार दिलाने के लिए उन्होंने अपना जीवन लगा दिया। उनके ही संघर्ष से हमें झारखंड अलग राज्य मिला। शाम को 6.40 बजे चार्टर्ड प्लेन से गुरुजी का पार्थिव शरीर एयरपोर्ट पर पहुंचा। इसके बाद शाम 7 बजे जैसे ही एयरपोर्ट से गुरुजी के पार्थिव शरीर को लेकर वाहनों का काफिला बाहर निकला तो हजारों लोग एक झलक पाने को बेताब हो गए। गुरुजी का पार्थिव शव जिस वाहन में है, उसमें पुत्र मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन, छोटे बेटे बसंत सोरेन, झामुमो महासचिव विनोद पांडेय मौजूद हैं। हेमंत सोरेन शव वाहन पर लटक कर लोगों को सांत्वना देते हुए एक ओर लगी सीट पर बैठ जाते हैं। चारों तरफ पुलिस का कड़ा पहरा है, लेकिन भीड़ रुकने का नाम नहीं ले रही। झारखंड के हर कोने से आए लोग यहां जमा हैं। कोई चुपचाप खड़ा है, कोई गुरुजी अमर रहें… के नारे लगा रहा है तो कोई दहाड़ मारकर रो रहा है। माहौल गमगीन है। शिबू सोरेन के निधन पर दिल्ली से रांची प्रस्थान करने से पूर्व सोमवार की शाम मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने कहा कि आज का दिन बहुत दुखद है। देश के आदिवासी नायक, जिन्हें दिशोम गुरु के नाम से भी जाना जाता है, अब हमारे बीच नहीं रहे। वे आदिवासियों के लिए छांव थे। मुख्यमंत्री ने भावुक होते हुए कहा कि इस महान पुरुष की क्षति पर शोक व्यक्त करने के लिए हमारे पास शब्द नहीं हैं। अपने नायक के इंतजार में सड़क पर उतरी रांची मोरहाबादी : एलपीएन शाहदेव चौक से मोरहाबादी तक लोगों की भीड़ है। मोरहाबादी स्थित गुरुजी का आवास, जिसे हेरिटेज बिल्डिंग घोषित किया गया है, वहां पहले से हजारों लोग मौजूद हैं। हर जुबां पर शिबू सोरेन अमर रहे… दिशोम गुरु अमर रहे… जैसे नारे गूंज रहे हैं। हरमू रोड : हरमू चौक से सहजानंद चौक के बीच का दृश्य अलग दिखा। केन्द्रीय सरना स्थल के बाहर खड़ी सैकड़ों महिलाएं हाथ जोड़ प्रमाण करते हुए पुष्प वर्षा कर रही हैं। यहां से किशोरगंज होते हुए न्यू मार्केट चौक तक सड़क किनारे खड़े लोग उन्हें नमन कर रहे हैं। अरगोड़ा चौक : वाहनों की लंबी कतार के पीछे-पीछे चलते हुए जब मैं सेटेलाइट चौक से डिबडीह पुल की ओर बढ़ा, तो सड़क किनारे खड़े लोगों ने जोरदार नारेबाजी करते हुए अंतिम जोहार कहा। कोई अपने आंसू पोंछ रहा था, कोई नमन कर रहा था। बिरसा चौक : जैसे ही काफिला आगे बढ़ा, हर चौक पर लोगों का हुजूम दिखा। लोग हाथ जोड़कर, आंखों में आंसू लिए गुरुजी को नमन कर रहे हैं। बिरसा चौक के पास एक बुजुर्ग ने हाथ जोड़कर सिर झुकाया और अंतिम जोहार करते हुए कहा- अब झारखंड शून्य हो गया।


