भास्कर न्यूज | बलौदाबाजार नगर के दशहरा मैदान में स्व. सोनचांद वर्मा स्मृति फाउंडेशन के तत्वावधान में आयोजित भव्य सप्तदिवसीय श्रीराम कथा के दूसरे दिन भक्ति, श्रद्धा और आध्यात्मिक उल्लास का अद्भुत दृश्य देखने को मिला। कथा स्थल पर सुबह से ही श्रद्धालुओं का तांता लगना शुरू हो गया और शाम होते-होते हजारों की संख्या में लोग रामकथा श्रवण के लिए उमड़ पड़े। पूरा पंडाल राम नाम और शिव–शक्ति की महिमा से गूंज उठा। अयोध्या धाम से पधारीं मानस कोकिला दीदी देवी चंद्रकला ने व्यासपीठ से भगवान शिव और माता पार्वती के पावन विवाह प्रसंग का अत्यंत सजीव, भावपूर्ण और मार्मिक वर्णन किया। उनके मधुर कंठ से प्रवाहित कथा ने श्रोताओं को भावविभोर कर दिया। कथा के दौरान ऐसा प्रतीत हुआ मानो कैलाश पर्वत से लेकर हिमालय की गोद तक का दिव्य दृश्य श्रद्धालुओं की आंखों के सामने साकार हो उठा हो। दीदी देवी ने कहा कि भगवान शिव ‘कल्याण’ के प्रतीक हैं और माता पार्वती ‘शक्ति’ की। जब शक्ति और कल्याण का मिलन होता है, तभी लोककल्याण का मार्ग प्रशस्त होता है। उनके इस संदेश ने श्रद्धालुओं को जीवन में संतुलन, संयम और सेवा का मार्ग अपनाने की प्रेरणा दी। कथा का विशेष आकर्षण भगवान शिव की अनूठी और अलौकिक बारात का वर्णन रहा। भूत, प्रेत, गण, नंदी और देवताओं से सजी शिव बारात के प्रसंग पर पूरा पंडाल उल्लास से भर उठा। भजनों की मधुर प्रस्तुति और सुंदर झांकियों ने वातावरण को भक्तिरस में सराबोर कर दिया। कई श्रद्धालु भाव-विभोर हुए। इस अवसर पर छत्तीसगढ़ शासन के राजस्व मंत्री टंकराम वर्मा एक श्रद्धालु के रूप में पूरे आयोजन में सक्रिय रूप से सहभागी रहे। उन्होंने सपरिवार व्यासपीठ का पूजन कर आशीर्वाद लिया और आम श्रद्धालुओं के बीच बैठकर रामकथा का श्रवण किया। उन्होंने कहा कि राम और शिव की कथाएं केवल धार्मिक प्रसंग नहीं हैं, बल्कि जीवन को संस्कारित करने का मार्ग दिखाती हैं और समाज को सकारात्मक दिशा देती हैं।


