भास्कर न्यूज| महासमुंद महासमुंद नगर के इ मलीभाठा में आयोजित शिव महापुराण ज्ञान यज्ञ सप्ताह में पं. कमलेश प्रसाद दुबे के भक्तिमय व संगीतमय वातावरण में प्रवचन जारी है। कथा के तीसरे दिन बुधवार को पं. दुबे ने सती विवाह, शिव सती चरित्र और विश्व मोहिनी नारद जी की कथा का वर्णन किया। उन्होंने कहा कि भगवान आशुतोष मां जगदम्बा सती के साथ मिलकर सृष्टि के विकास और उत्थान में मानव कल्याण के लिए अवतरित हुए। उन्होंने कहा कि शिव अनादि व अनंत शक्ति है उनके उपासना मात्र से जीव का कल्याण होता है और मनुष्य पापों से मुक्त होता है। मोह माया के बारे में बताते हुए कहा कि महान कृषि नारद भी माया के वश में होकर अपना संकल्प गंवा बैठे जिसे भगवान विष्णु और शिव ने नष्ट किया। कथा का विस्तार करते हुए उन्होंने बताया कि हम सभी को माया से रहना चाहिए और ईश्वर भक्ति में समय लगाना चाहिए। उन्होंने बताया कि माता सती प्रजापति दक्ष की पुत्री थीं और भगवान विष्णु के प्रति समर्पित थीं, लेकिन उनका मन बचपन से ही भगवान शिव के लिए समर्पित था। सती ने भगवान शिव को पति के रूप में पाने के लिए कठोर तपस्या की थी। प्रजापति दक्ष भगवान शिव को पसंद नहीं करते थे, क्योंकि वे शिव के भयानक रूप (भस्म, भूत-प्रेत) के विरोधी थे। ब्रह्मा जी की सलाह पर दक्ष ने अपनी पुत्री का विवाह शिव के साथ किया, यद्यपि वे मन से इसके विरोधी थे। शिवजी ने सती के प्रति प्रेम के कारण विवाह स्वीकार किया। बारात में शिवजी के गण, भूत-प्रेत शामिल थे, जिसे देखकर सती की माता मैना ने पहले तो इनकार कर दिया था, लेकिन बाद में ऋषि-मुनियों के समझाने पर विवाह हुआ। पं. जी ने बताया कि विवाह के बाद सती कैलाश पर शिव के साथ रहने लगीं, लेकिन दक्ष के मन में शिव के प्रति बैर और विरोध का भाव हमेशा रहा।


