शिव भक्ति, जाप, अभिषेक व नन्दी के कान में कहने से पूरी होती है मनोकामना : पं. दुबे

भास्कर न्यूज| बिरकोनी नगर पंचायत तुमगांव के वार्ड 4 में चल रहे शिव महापुराण में शिव नाम जाप के साथ रुद्राभिषेक हुआ। आचार्य पंडित कमलेश दुबे ने कहा है कि शिव लिंग पर शंख से अभिषेक नहीं करना चाहिए। उन्होंने शंखचूर्ण कथा उधार में यह बाते कही। आगे बताया कि भगवान विष्णु पर सीधे जल नहीं चढ़ाया जाता बल्कि शंख से जल अर्पित करना चाहिए। यह अतिप्रिय हैं। नन्दी प्रसंग की व्याख्या करते हुए आचार्य दुबे ने बताया कि सभी भगवान विष्णु की तरह पुत्र प्राप्ति की कामना करते है। क्योंकि कोई भी साहिब के समान पुत्र की चाह नहीं करता क्योकि वे वैराग्य जीवन व्यतीत करते है। क्योंकि शिव की एक परम भक्त शिलाद था जिन्होंने भगवान शिव की तरह पुत्र की कामना करता था। वह प्रतिदिन भगवान शिव के साथ इंद्र की भी उपासना करता था। एक दिन इंद्र प्रकट हुए और उनकी इच्छा पूछी तो उन्होंने भगवान शिव की तरह पुत्र की कामना हैं इंद्र ने कहा कि तुम्हारी जो मनोकामना हैं उसके लिए विशेष यज्ञ करना होगा। फिरयज्ञ विधान से शिलाद ने यज्ञ प्रारम्भ किया। भगवान शिव प्रगट हुए और वरदान मांगने को कहा शिव के समान पुत्र कामना करते हुए भोले भंडारी ने कहा कि मैं तुम्हे नर के रूप में नही बल्कि नन्दी के रूप में पुत्र दे रहा हूँ। इस पर भगवान शिव के हृदय और आष्ठी से प्रकाश पुंज प्रगट हुआ।नन्दीश्वर के भविष्यवाणी करते हुए नारद ने शिलाद को बताया कि यह बालक अल्पायु हैं। महामृत्युंजय के जाप से शिवधाम प्राप्त किया भगवान शिव का पार्षद हैं इस लिए सातवें वर्ष में वापस चला जाएगा। इस लिए शिलाद दुखी होने लगे और अपने बालक को कभी वेद ग्रन्थों की शिक्षा नहीं दी।अल्पायु बालक पांच वर्ष की उम्र में महावन मे शिव उपासना करते निकल गए और महामृत्युंजय के जाप से दीर्घायु से शिवधाम प्राप्त किया। शिवलिंग अभिषेक नन्दी पूजा के बिना अधूरा है।शिवलिंग अभिषेक के बाद नन्दी पूजा शिवलिंग महादेव की पूर्ण आराधना मानी जाती हैं।व्यासपीठ दुबे ने बताया की नन्दी कोई साधारण अवतार नहीं बल्कि वह शिव के हृदय व अग्नि से प्रकट होने के कारण धर्म का अवतार माना गया हैं।इसलिए लोगों को नन्दी की कभी बैल व गया को कभी पशु नहीं मानना चाहिए।

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