मरूधरा के मध्यवर्ती जिलों में दो दिनों की आंशिक राहत के बाद मौसम ने एक बार फिर रौद्र रूप धारण कर लिया है। बुधवार सुबह नागौर जिला मुख्यालय सहित कुचेरा, मुंडवा, मेड़ता के जारोड़ा, डेगाना, सांजू और रियां बड़ी क्षेत्र घने कोहरे की चादर में लिपटे नजर आए। बर्फीली शीतलहर और घने कोहरे के गठजोड़ ने समूचे क्षेत्र में ठिठुरन बढ़ा दी है, जिससे न्यूनतम तापमान 3°C के करीब पहुंच गया है। सुबह की शुरुआत भारी धुंध के साथ हुई, जिसके कारण लोग देर तक घरों में दुबके रहे और सड़कों पर अलाव जलते नजर आए। डीडवाना हाईवे पर ‘जीरो विजिबिलिटी’ जैसे हालात डीडवाना-कुचामन जिले में भी मौसम के हालात बेहद चुनौतीपूर्ण बने हुए हैं। लगातार चल रही शीतलहर के बीच डीडवाना शहर और आसपास के इलाकों को घने कोहरे ने अपनी गिरफ्त में ले लिया है। आलम यह रहा कि डीडवाना हाईवे पर दृश्यता (विजिबिलिटी) घटकर मात्र 20 मीटर रह गई, जबकि शहरी क्षेत्रों में यह 50 मीटर के आसपास दर्ज की गई। परबतसर में भी घने कोहरे के कारण वाहन चालकों को दिन में भी लाइट जलाकर चलना पड़ा। भारी धुंध की वजह से लंबी दूरी की बसों और मालवाहक वाहनों की रफ्तार पर ब्रेक लग गया। खेती के लिए ‘अमृत’ बनी ओस की बूंदें एक ओर जहां कोहरे और ठंड ने आमजन की मुश्किलें बढ़ा दी हैं, वहीं किसानों के चेहरे खिल उठे हैं। कृषि विशेषज्ञों के अनुसार, कोहरे के साथ गिर रही ओस की बूंदें रबी की फसलों, विशेषकर गेहूं, सरसों और चने के लिए ‘अमृत’ के समान हैं। यह प्राकृतिक नमी फसलों की गुणवत्ता और पैदावार बढ़ाने में सहायक सिद्ध होगी। नागौर के जारोड़ा, मुंडवा और सांजू जैसे कृषि प्रधान क्षेत्रों में इस मौसम को फसल के लिए संजीवनी माना जा रहा है। क्षेत्रवार मौसम का मिजाज जिले के अलग-अलग हिस्सों में मौसम का विविध प्रभाव देखा गया। जहां डेगाना, कुचेरा और जायल में घना कोहरा छाया रहा, वहीं लाडनूं और निम्बी जोधा कस्बे में धुंध का हल्का असर देखने को मिला। इसके विपरीत, नावा और कुचामन क्षेत्र में मौसम की स्थिति काफी हद तक सामान्य बनी रही, जहां सुबह की हल्की धुंध के बाद दृश्यता साफ हो गई और यातायात सुचारू रूप से चलता रहा। वहीं मकराना क्षेत्र में मौसम आज भी लगातार साफ बना हुआ है, जहां धूप खिलने से लोगों को शीतलहर से राहत मिली है।


