भास्कर न्यूज | राजनगर राजनगर पशु चिकित्सालय परिसर में बुधवार को कृषि, पशुपालन और सहकारिता विभाग के तत्वावधान में बछड़ा प्रदर्शनी कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस प्रदर्शनी में प्रखंड के विभिन्न गांवों से आए पशुपालकों ने देसी नस्ल की विभिन्न प्रजातियों के बछड़ों को प्रदर्शित किया, जिसमें विशेष रूप से शैवाल एवं गिर नस्ल के बछड़ों ने लोगों का ध्यान आकर्षित किया। चयन टीम ने उत्तम नस्ल के बछड़ों का चयन कर पशुपालकों को पुरस्कृत किया। इस अवसर पर पशु चिकित्सकों ने पशुपालकों को वैज्ञानिक पशुपालन, नस्ल सुधार, पशु आहार एवं स्वास्थ्य प्रबंधन से संबंधित महत्वपूर्ण जानकारियां दीं। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि प्रखंड प्रमुख आरती हांसदा ने कहा कि आदिवासी-मूलवासी समाज आदिकाल से पशुपालन से जुड़ा रहा है। पशु उनकी जीविका का एक प्रमुख साधन हैं। समय की आवश्यकता है कि पारंपरिक खेती और पशुपालन से आगे बढ़कर वैज्ञानिक पद्धति को अपनाया जाए, जिससे दुग्ध उत्पादन बढ़े और पशुपालकों की आय में वृद्धि हो सके। सरकार द्वारा किसानों को प्रशिक्षण दिया जा रहा है और मुख्यमंत्री पशुधन योजना के तहत पशु भी उपलब्ध कराए जा रहे हैं। पशुपालकों से उन्होंने अधिक से अधिक योजनाओं का लाभ उठाने की अपील की। विशिष्ट अतिथि मुखिया राजो टुडू ने कहा कि इस तरह के आयोजनों से पशुपालकों को नई जानकारी मिलती है। सरकार द्वारा चलाई जा रही योजनाओं का सही उपयोग कर पशुपालक स्वरोजगार की दिशा में आगे बढ़ सकते हैं।


