भास्कर संवाददाता | टोंक विश्व प्रसिद्ध मौलाना अबुल कलाम आजाद अरबी-फारसी शोध संस्थान के वैभव लौटाने पर रविवार को सेमिनार में इसका विकास एक विश्वविद्यालय की तर्ज पर करने की बात उठी। टोंक प्रोग्रेसिव कमेटी के तत्वावधान में सवाई माधोपुर हाइवे के समीप पुलिया के निकट राज मिडवे पर हुए सेमिनार में अरबी-फारसी, अंग्रेजी, हिंदी, उर्दू भाषाओं के पत्र वाचन कर यहां की दुर्लभ ग्रंथ एवं दुनिया में इसकी महत्ता पर रोशनी डाली। इस संस्थान को निदेशालय बनाने वाले तत्कालीन मुख्यमंत्री भैरोसिंह शेखावत को भी याद किया गया। कई विद्वानों ने शायराना अंदाज में अपनी बात रखी। मुख्य अतिथि पूर्व आईएएस जाकिर हुसैन ने संस्थान के विकास के लिए हर संभव सहयोग का भरोसा दिलाया तथा फारसी में काव्य पंक्तियां पढ़ी। 5 अध्यक्षता सेवानिवृत्त जिला एवं सेशन न्यायाधीश अय्यूब खान ने की, जिन्होंने भर्ती सहित अन्य समस्याओं के समाधान के लिए कानूनी सहयोग देने का भरोसा दिलाया। प्रोग्रेसिव कमेटी के संरक्षक एवं संयोजक सरताज अहमद एडवोकेट ने संस्थान की वर्तमान स्थिति से अवगत कराते हुए ईमानदारी से प्रयासों की आवश्यकता बताई। सदर मुफ्ती आदिल नदवी ने तहकीक (शोध) पर विशेष जोर देते हुए इसके विश्वविद्यालय के रूप में विकसित करने की बात रखी। जयपुर के समाजसेवी आजम बैग ने आर्थिक सहयोग देने पर बल दिया। सेठ मोइनुद्दीन निजाम और कमलेश सिंगोदिया ने शिक्षा को बढ़ावा देने की बात करते हुए टोंक का नाम देश-विदेश में रोशन करने वाले इस संस्थान के उत्थान के लिए पूर्ण सहयोग का वादा किया। मौलवी आमिर सिद्दीकी ने अरबी में पत्र वाचन किया। अन्य वक्ताओं में बार एसोसिएशन के पूर्व अध्यक्ष शैलेंद्र शर्मा ने शोध संस्थान की स्थिति को अवगत कराते हुए टोंक में विश्वविद्यालय की आवश्यकता के लिए संघर्ष किए जाने पर जोर दिया। तारिक राना ने अंग्रेजी में पत्र वाचन किया। सैयद साजिद अली, अजीजुल्लाह शीरानी, आर्टिस्ट शाइस्ता खान, डॉ. सैयद बदर अहमद, मौलवी सैयद अब्दुर्रहमान, शहाब अहमद, मौलवी अब्दुलर्रहमान आदि ने भी अपने विचार व्यक्त करते हुए शोध संस्थान के दुर्लभ ग्रंथ के खजाने को प्रतिपादित किया तथा उसके लिए हर स्तर पर अपनी बात रखने पर जोर दिया। मुरारी सिंहल, मिर्जा नसीम बैग, फहीमुद्दीन मुराद, साहबजादा अब्दुल रशीद, खुर्शीद आलम, जफर रजा राजेंद्र गोयल, सोहेल वकील, डॉ. मोहम्मद अकमल, रामलाल अत्तार, अहसान बाबा, आमिर फारूख, मोहम्मद हारून रशीद, मोहम्मद शकील, अलमान खान, अमजदु्ल्लाह खान, पूर्व पार्षद ताबिश अजमल आदि थे। 30 वर्षों से अटकी भर्तियों को शुरू करने की गई मांग सेमीनार से 30 वर्षों से अटकी भर्तियों को शुरू करने, समस्याओं के समाधान तथा विश्वविद्यालय स्तर पर विकास के लिए केंद्र व राज्य सरकार से मांग की गई। शोध संस्थान के उत्थान एवं शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए तन-मन-धन से सहयोग का आह्वान किया गया। उल्लेखनीय है कि संस्थान राजस्थान सरकार द्वारा 1978 में स्थापित एक अंतरराष्ट्रीय ख्याति प्राप्त केंद्र है, जो अरबी, फारसी तथा उर्दू, संस्कृत भाषाओं की दुर्लभ पांडुलिपियों, ऐतिहासिक दस्तावेजों और शोध सामग्री का अनमोल खजाना है।


